Artificial Intelligence (AI) Kya Hota Hai?

Artificial Intelligence (AI) Kya Hota Hai?

    Hello Friends, aap logo ne Artificial Intelligence ke bare me to suna hoga. agar aapne nahi suna ya iske bare me nahi pata to aaj me aapko Artificial Intelligence ke bare me hi batane vala hu. 
Artificial Intelligence (AI) Kya Hota Hai? - Jankari Dunia
Artificial Intelligence


jo bhi robot, Automatic Machine etc. me jis Technology ka use hota hai vo Artifical Intelligence hi hota hai.
agar sirf is word ka matlab hindi me samze to artificial ka matlab krutrim yani ki insano ke dwara banaya hua. aur intelligence ka matlab buddhimatta yani ki sochne ki shakti hoti hai.

dosto ye jo intelligence power hoti hai vo hum insan ke anadar apne aap bahti hai. kuch dekh kar, kuch sun kar, kuch touch karke hum yah soch lete hai ki us chis ke sath kaisa behave karna chahiye. thik isi tarah se Robot ke andar bhi ek tarah ka Intelligence Develop karaya jata hai. jisko Artifical Intelligence kahte hai.
ab Artificial Intelligence ek bahut bada topic hai. isme daily kuch n kuch research ho rahi hai. aapne Robot Movie bhi dekhi hogi. jo kuch is tarah ke researches me based thi.

ab aapke man me kuch saval aa rahe honge ki Artifical Intelligence me aage kya hone vala hai. Artificial Intelligence ek aisi intelligence hai jo apne aap se artificial create ho jaye ya fir aapke coputer me insano jaisa dimag aa jaye to ise hum kahenge artificial intelligence.
Artificial Intelligence kisi ek tarah ki nahi hai balki yah bahut se tarah se use hoti hai bahut sare aise artificial intelligence hai jinhi hum bahut pahle se use karte aa rahe hai aur bahut si to abhi future me ayenge
aayiye jante hai ki yah artificial intelligence kitne tariko kahota hai.

Krutrim Buddhimatta (AI) ke prakar - Types of Artificial Intelligence


Dosto Artidicial Intelligence ko AI bhi kaha jata hai aur ise 3 bhago me divide kiya gaya hai.

1: Kamjor AI (Weak AI)
Dosto, agar hum baat kare kamjor AI ki to isko hum kahenge Artificial Narrow Intelligence. Weak AI kuch is tarah ke intelligence hai jo keval ek specific device me hi acche se kam kar sakti hai.

For Example: agar aapka computer chess game khelta hai to vo chess khelne me expert hai but uske alava vah weak AI kuch aur nahi kar sakta hai. ya fir jo Amazon, Flipkart jaise Shopping Sites me jo recommendation niche aate hai, agar aap kuch kharidate hai to par ye system expert hai apna kam karne ke liye hai. But ye chess game nahi khel sakta hai. to aise intelligence jo keval ek specific area me kam kar sakte hai use hum kahte hai Artificial Narrow Intlligence.
Dosto, ab apko samaz me aa gaaya hogaki kamjor AI kya hota hai, kaise kam karta hai aur yah kyo ek hi device me keval ek kam kar sakta hai.

2: ShaktiShali AI (Strong AI)
Dosto agar hum baat kare insan ke dimag ka to ye bahut complicated hai, insan ke pass bahut jyada Common Sense hai ya fir kahe ki aisi intelligence hai jo ek machine me shayad nahi aa sakti hai. to machine ko kuch insan ke dimag jaisa banane ke liye aati hai shaktishali AI jise hum Artificial General Intelligence bhi kahte hai.
dosto shakti shali AI aisa system hai jaha pr insan ka dimag aur machine dono lagbhag barabr hota hai. yani ki jo kam aap kar sakte hai, aap jo soch sakte hai aur aisi bahut si common chije hai jo hum insan aaram se kar lete hai. agar vo sab kaam ek Robot ya machine kar paye to use hum kahenge Shaktishali AI ya Artificial Wide Intelligence.

3:Vilakshanta (Singularity)
Dosto, Shaktishali AI ka use abhi tak nahi hota hai. shayad 2050 tak market me aa jayegi tab aapko aise machine, aise Robot dekhne ko milenge jinka intelligence level insan ke barabar hoga
dosto, agar aap soch rahe hai ki iske aage kuch nahi hai toh aap bilkul galat soch rahe hai kyuki ye Artificial Intelligence hai. agar ek bar ek Machine ne kuch sikh liya to use aur improve karta rahega.

For Example: agar hamare pas kuch computer hai to mil kar aur accha computer banayenge aur jo computer banege unko milakar aur accha computer banayenge, to aise me ye jo AI hai ye aur jyada teji se vikasit ho jayenge to aise me ek chiz nikal kar ayegi jise hum Singularity ya Artificial Super Intelligence kahte hai.
agar hum general me kahe to Singularity aisi intelligence hai jiske aage insan kuch bhi nahi hai. matlab agar ek bar ye insan ke dimag ke level me aa gaya to badhte badhte usase kahi aage nikal jayega.
dosto, aise me dekha jaye to ye bahut acchi baat hai, hum bahut acche se control karenge chiso ko hum naye-naye experiment karenge aur hamare pas bahut powerful Robot rahenge to unki help se hum bahut kuch kar payenge.
But friends agar Machine Super Intelligence ho gaya to kya Robot hamari baat manege, is baat ko lekar duniya ke bahut se Computer Scientist even Bill Gates, Elon Musk ne ye doubt rakhe hai ki agar machine aur insan ke dimag me Singularity ho gayi to dunia khatre me aa jayegi.
But agar Super Intelligence ka time aya aur Machinne insan ke sare rule ko sahi sahi follow karne lage to ise hum kahenge Artificial Emotional Intelligence. matlab machino ke paas emotion hoga jisase vah insan ke control me rahe.

Toh dosto abb aap ko samaz aa gaya hoga ki Artificial Intelligence kya hota hai aur ye aage kaha tak ja sakta hai. aap apne vichar aur pratikriya ko hame comment karke bata sakte hai.
Thank You.

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi - Jankari Dunia

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते 

 Some Fact of Technology You Do not Know

Tech Fact - 1


Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
Tech Fact - 1

   नमस्कार दोस्तों आप देख रहे जानकारी दुनिया और टेक्नोलॉजी फैक्ट के नये एपिसोड में आपका स्वागत करते हैं जो आज से पहले आप नहीं जानते थे और इस को पढने के बाद आप जान जायेंगे कुछ मजेदार चीजे आपको जानने को मिलेगी चलिए शुरूवात करते हैं 

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
GPS



1 - आपको तो यही लगता होगा अगर आप अपने फ़ोन में GPS का इस्तेमाल करते हैं तो वह फ्री ऑफ कॉस्ट होता है उसके लिए आपको कोई भी पैसे नहीं देने पड़ते आप रास्ता ढूंढना चाहते हैं गली मोहल्ले, चौराहे में जाना चाहते हैं तो आप जब अपने गूगल मैप पर जाते हैं और लोकेशन चेक करते हैं इंटरनेट ऑन किया गाड़ी स्टार्ट की और निकल लिए कोइ पेसे नहीं देने पड़ते आपको लेकिन आपको बता दूं कि GPS पूरी तरह से फ्री नहीं है जैसा कि हम जानते हैं GPS टेक्नोलॉजी अमेरिका की है और इसके लिए पैसा अमेरिका वाले लोग देते हैं जितने भी लोग टैक्स भरते हैं उनके टैक्स की कमाई उनके पैसों की कमाई में से जो टैक्स जाता है वह GPS को फंडिंग करता है और इसका खर्चा 1 दिन का एक मिलियन डॉलर है जी हा वन मिलियन डॉलर 1 दिन का लगता है GPS को ऑपरेट करने चलाने में और यह सारे पैसे अमेरिकन टैक्स पयेर्स से आते हैं और हम तो फ्री में यूज कर रहे हैं ये एक फैक्ट है ज्यादातर लोग इसे नहीं जानते लेकिन अभी आप जान गए  





2 - 30 नवंबर को क्या आता है जी नहीं 30 नवंबर को मेरा हैप्पी बर्थडे नहीं है मेरा जन्मदिन नहीं है लेकिन 30 नवंबर को कंप्यूटर सिक्योरिटी डे होता है 30 नवंबर को कंप्यूटर सिक्योरिटी डे के तौर पर मनाया जाता है पूरे विश्व में जी हां तो उस दिन कम से कम अपने कंप्यूटर की सफाई कर लिया करो और यह देख लिया करो कि कोई वायरस तो नहीं है पूरे साल सही से रहे गा 

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
iPhone 1



3 - क्या आपको पता है कि जब 2007 में स्टिव जॉब में iPhone प्रजेंट किया था लांच किया था उस की प्रेजेंटेशन की थी बहुत सारे लोगों के सामने दिखाया था कि हमने एक नया iPhone या पहला  iPhone लॉन्च किया है तो उस वक्त उस फोन में बग्स थे और वह पूरी तरीके से तैयार नहीं था यह इनसाइडर स्टोरी है ज्यादातर लोग नहीं जानते इंटरेस्टिंग चीज है जो वो फोन लांच हुआ था तो उन्हें एक बेंच डेस्क थी मतलब ऐसे कुछ अगर लकड़ी का था जहां पर वह स्पीच देने की जगह होती है वहां पर और तू वहां जो फोन था ठीक है रखा हुआ था तो वो बिच  बिच मे आके फोन को स्विच कर रहे थे क्योंकि वह फोन हैंग हो जाता था उसमे रैम ऑप्टिमाइजेशन ठीक नहीं थी वो लोगों को क्या बोलते कि मेरा iPhone पूरी तरीके से तैयार नहीं है डेट अनाउंस हो चुकी थी तो तीन,चार फोन रखे हुए थे के पीछे छुपा के जो अनाउंस टेबल थी वहां पर जो भी स्पीच देने की तो बीच-बीच में व हां से आते थे एक iPhone में कुछ करके दिखाया कॉल करके दिखाई उसको स्विच करके दूसरा वाला उठा लिया और फिर उसमें कुछ और करके दिखाया तो इस में बग्स थे Apple के एंप्लॉय और जितने भी सीनियर लोग थे बाद में यह बात उन्होंने  बताई कि ऐसी चीज भी हुई थी उसमें जो वीडियो क्लिप थी और जो ऑडियो क्लिप थी पहले iPhone में वो पूरी प्ले नहीं हो सकती थी सिर्फ कुछ हिस्सा  ही प्ले  हो सकता था अगर आप पूरी ऑडियो और वीडियो को प्ले करेंगे तो फोन क्रैश हो जाता जी हां यह बग था और यह स्टार्टिंग में किसी को भी नहीं बताया गया बाद में जब वह मार्केट में रिलीज हुआ फोन लांच हुआ तब इसको ठीक करके किया गया लॉन्च लेकिन जब उसकी प्रेजेंटेशन हुई थी तभी iPhone में ऐसा बग था एक और बग था की अगर आप ईमेल भेजते हैं उसके बाद इंटरनेट चलाते हैं तो वह सही से काम करता अगर आप ईमेल भेज रहे हो फिर इंटरनेट सब काम करेगा लेकिन अगर आप इंटरनेट सर्च करेंगे और उसके बाद ईमेल भेजेंगे तो वह नहीं जाएगा और फोन क्रैश  हो जाएगा यह बात मुझे नहीं लगता कोई जानता होगा पहले मैं भी नहीं जानता था लेकिन यह सच्चाई है अब आप जान गए 

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
Neil Armstrong (astronaut)



4 - अपोलो-11 मार्स मिशन के बारे में तो आप जानते ही होंगे जो लोग थे जो इंसान थे चांद पर उतर रहे थे नया दौर था कुछ नई चीज थी तो आपको पता है कि वह जो एस्ट्रोनॉट थे उनका लाइफ इंश्योरेंस उन्हें नहीं मिला था क्योंकि जो इंश्योरेंस कंपनी है उनको लग रहा था कि वह जिंदा लौटेंगे ही नहीं मर जाएंगे तो क्या किया गया था पता है उन्होंने अपने ऑटोग्राफ देकर अपनी फैमिली को दे दिए थे ताकि अगर वह उस मिशन से ना लौटे वह ऑटोग्राफ ऑक्शन में लगाकर उनकी जो फैमिली है वह पैसे कमा सके क्योंकि वह लोग हैं जो पहले गए थे जो जो चांद पर गए थे उन लोगों के ऑटोग्राफ है तो उनको बेचकर अपनी फैमिली के लिए पैसा इकट्ठा कर सके क्योंकि उनके फॅमिली मे कमाने वाले वही थे जो एस्ट्रोनॉट थे अगर वह ही नहीं बचेंगे तुम का खर्चा कैसे चलेगा उनके फॅमिली  कैसे चलेगी तो उन सारे एस्ट्रोनॉट ने  साइन करके अपने ऑटोग्राफ देकर अपनी फैमिली को दे दिए थे इन केस वो जिन्दा ना लौट आए तो उसे ऑटोग्राफ को बेच कर पैसे ले ले तो ऐसा हुआ था और यह कोई नहीं जानता था  

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
Drone




5 - क्या आपको पता है कि ऐसा कौन सा देश है जिसने सबसे पहले ड्रोन  बनाया जो सबसे ज्यादा ड्रोन बनाता है जिसमें शुरुआत हुई थी उनकी आप गेस भी नहीं कर सकते आप को बिल्कुल लगेगा नहीं कि यह देश भी हो सकता है जो इज़राइल इज़राइल एक ऐसा देश है जो सबसे ज्यादा ड्रोन प्रोडक्शन होता है जिसके जो इंचार्ज है जिसको चार्ज दिया गया है ज्यादा से ज्यादा ड्रोन एक्सपोर्ट करने का वह पे  बहुत ज्यादा ड्रोन बनते यूंज भी किए जाते हैं और एक्सपोर्ट भी किये जाते हैं तो यह बात आप शायद नहीं जानते होंगे लेकिन इस्राइल ड्रोन के मामले में काफी आगे है आशा करता हूं आपको यह टेक्नोलॉजी फैक्ट पसंद आए होंगे

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शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi - Jankari Dunia

शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi - Jankari Dunia

From the beginning to the end, Sachin Tendulkar's biography Hindi

     
शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi
Sachin Ramesh Tendulkar

      दोस्तों भारत में क्रिकेट को एक खेल ही नहीं बल्कि एक धर्म का दर्जा दिया गया है और उस धर्म में सचिन भगवान की तरह पूजे जाते हैं दोस्तों सचिन युवा क्रिकेटर है जिसने भारतीय क्रिकेट को एक नई ऊंचाई दी और क्रिकेट के खेल को घर घर तक पहुंचा दिया एक समय तो ऐसा था कि सचिन के आउट होते ही आधा भारत टीवी बंद कर देता था और क्रिकेट में सचिन को भगवान का दर्जा देना शायद इसलिए भी सही है क्योंकि अगर रिकॉर्ड की बात करें तो सचिन के आस-पास भी कोई नहीं भटकता सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड हो या शतक मारने का या फिर चौका लगाने का ही क्यों ना हो सचिन हर रिकॉर्ड में सबसे आगे हैं एक बार तो सचिन तेंदुलकर की तारीफ में एक ऑस्ट्रेलियन प्रशंसक ने कहा कि अपराध तब करो जब सचिन बैटिंग कर रहा हो क्योंकि भगवान भी उस समय उनकी बैटिंग देखने में व्यस्त होते हैं सचिन भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी हैं इसके अलावा उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है सचिन एक अच्छे खिलाडी होने के साथ ही साथ एक अच्छे इंसान भी हैं और हर साल 200 बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी के लिए अपनालय नाम की एक गैर सरकारी संगठन भी चलाते हैं दोस्तों आइए बिना आपका समय खराब किए हम सचिन तेंदुलकर की बचपन से लेकर क्रिकेट में उनकी अद्भुत सफलता तक के सफर को शुरू से जानते हैं|

शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi
Sachin Ramesh Tendulkar


      सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को राजापुर के एक मिडिल क्लास मराठी फैमिली में हुआ था उनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर था जो एक लेखक और प्रोफ़ेसर थे और उनकी मां का नाम रजनी तेंदुलकर था जो एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थी यह बहुत कम लोग जानते होंगे कि सचिन तेंदुलकर अपने पिता रमेश तेंदुलकर की दूसरी पत्नी के पुत्र हैं रमेश तेंदुलकर की पहली पत्नी से तीन संताने हुई अजीत, नितिन, और सविता जो कि तीनों सचिन से बड़े हैं सचिन तेंदुलकर का नाम उनके पिता रमेश तेंदुलकर ने अपने प्रिय संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था सचिन को क्रिकेट का शौक बचपन से ही है लेकिन शुरू से ही वह बहुत ही शरारती बच्चों में गिने जाते थे जिसकी वजह से अक्सर स्कूल के बच्चों के साथ उनका झगड़ा होता रहता था सचिन की शरारतों को कम करने के लिए उनके बड़े भाई अजीत ने उन्हें 1984 में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कराने का सोचा और रमाकांत आचरेकर के पास ले कर गए रमाकांत आचरेकर उस समय के प्रसिद्ध कोच में गिने जाते थे लेकिन सचिन पहली बार उनके सामने अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और आचरेकर ने उन्हें क्रिकेट सीखाने से मना कर दिया लेकिन बड़े भाई अजीत के रिक्वेस्ट पर आचरेकर फिर से एक बार सचिन का मैच देखा लेकिन इस बार वे सचिन को एक पेड़ के पीछे से छुप कर देख रहे थे और तब सचिन ने बहुत अच्छा मैच खेला था जिससे उन्हें पता चल गया कि सचिन केवल हमारे सामने खेलने में असहज महसूस कर रहे हैं और फिर उन्होंने सचिन को अपने अकैडमी में ले लिया और क्रिकेट सीखाना शुरू कर दिया आगे चलकर आचरेकर को सचिन के बैट पकड़ने के तरीके से प्रॉब्लम थी क्योंकि सचिन बैट को बहुत पीछे से पकड़ते थे और आचरेकर के हिसाब से इस तरह से बात पकड़ने पर अच्छे शॉट नहीं लगाए जा सकते थे इसीलिए उन्होंने सचिन को बैट को थोड़ा ऊपर पकड़कर खेलने का सलाह दिया लेकिन इस बदलाव से सचिन कंफर्टेबल नहीं फील कर रहे थे और इसीलिए उन्होंने आचरेकर से रिक्वेस्ट किया कि उन्हें नीचे बैट पकड़ कर ही खेल लेते दरअसल बचपन में सचिन अपने बड़े भाई के बैट से खेलते थे और उनके छोटे-छोटे हाथों से बड़ी बैट को पकड़ने में बहुत दिक्कत होती थी और वह उस बेट को संभालने के लिए बहुत नीचे से पकड़ते थे वहीं से उन्हें बेड को नीचे पकड़ने की आदत हो गई आचरेकर तेंदुलकर की प्रतिभा से बहुत ही प्रभावित थे और इसीलिए उन्होंने सचिन को श्रद्धा आश्रम विद्या मंदिर में पढ़ाई के लिए शिफ्ट होने के लिए कहा क्योंकि वहां पर क्रिकेट की बहुत अच्छी टीम थी और उन्होंने देखा था कि सचिन को अगर एक अच्छा माहौल मिले तो वह कुछ भी कर सकते हैं तेंदुलकर ने भी अपने कोच के कहने पर उस स्कूल में एडमिशन ले लिया और एक प्रोफेशनल टीम के साथ क्रिकेट खेलने लगे वहां पढ़ाई के साथ-साथ शिवाजी पार्क में रोज सुबह-शाम आचरेकर की देखरेख में प्रैक्टिस करते थे सचिन को प्रैक्टिस कराते समय उनके कोच स्टंप पर एक सिक्का रख देते थे और दूसरे खिलाड़ियों को कहते थे कि वह सचिन को बॉलिंग करें जो खिलाड़ी सचिन को आउट कर देगा सिक्का उसका अगर सचिन को कोई भी खिलाड़ी आउट ना कर सका तो सिक्का सचिन का होता था सचिन के पास आज भी उनमें से 13 सिक्के हैं जिन्हें वो सबसे बड़ा ईनाम मानते हैं सचिन की मेहनत और प्रैक्टिस के दम पर उनका खेल बहुत ही जल्दी निखर गया और वह लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गए उन्होंने अपनी स्कूल टीम की तरफ से मैच खेलने के साथ ही साथ मुंबई के प्रमुख क्लब से भी खेलना शुरु कर दिया शुरू शुरू में सचिन को बॉलिंग का बहुत शौक था जिसकी वजह से 1987 में 14 साल की उम्र में बॉलिंग सीखने के लिए मद्रास के MRF बेस्ट फाउंडेशन जाए जहां ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज दिनेश लेली ट्रेनिंग देते थे लेकिन उन्होंने सचिन को बैटिंग सीखने का सुझाव दिया क्योंकि वह बैटिंग में अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे थे और फिर सचिन ने भी उनकी बात मान ली और फिर अपनी बैटिंग की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगे दोस्तो बता दूं कि लिली ने जिन खिलाड़ियों को तेज गेंदबाज बनने से मना किया उसमें सौरव गांगुली भी शामिल थे कुछ महीनों के बाद बेस्ट जूनियर क्रिकेट अवार्ड मिलने वाला था जिसमें 14 साल के सचिन की बड़ी दावेदारी मानी जा रही थी लेकिन उन्हें इनाम नहीं मिला जिससे वह बहुत दुखी हुए और तभी उनका मनोबल बढ़ाने के लिए पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उन्हें अपने पैड की एक जोड़ी दे दी तेंदुलकर ने लगभग 20 साल बाद 34 टेस्ट शतक गावस्कर के विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के बाद इस बात का जिक्र किया था उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए उस समय प्रोत्साहन का सबसे बड़ा स्रोत था 14 नवंबर 1987 को तेंदुलकर को रणजी ट्रॉफी के लिए भारत के घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट टूर्नामेंट में मुंबई की तरफ से खेलने के लिए सिलेक्ट किया गया लेकिन वह अंतिम 11 में किसी भी मैच में नहीं चुने गए उनका इस्तेमाल उस पूरी सीरीज में केवल रिप्लेसमेंट फील्डर के लिए किया गया था एक साल बाद इस 11 दिसंबर 1928 को सिर्फ 15 साल और 232 दिन की उम्र में तेंदुलकर ने अपने कैरियर की शुरुआत मुंबई की तरफ से खेलते हुए गुजरात के खिलाफ की उस  मैच में उन्होंने नाबाद शतक बनाया और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपने पहले ही मैच में शतक बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए और फिर 1988-89 के सेशन में वे पूरी  सीरीज में मुंबई की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने उसके बाद भी उनकी शानदार परफॉर्मेंस जारी रही और उन्होंने दिल्ली के खिलाफ ईरानी ट्रॉफी में भी नाबाद शतक बनाया उस समय विशेष भारत के लिए खेल रहे थे सचिन तेंदुलकर ने रणजी, दिलीप और ईरानी ट्रॉफी में अपने पहले ही मैच में शतक जमाया था और ऐसा करने वाले में भारत के एकमात्र बल्लेबाज हैं उनका यह रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है सचिन के जादुई खेल को देखते हुए सिर्फ 16 साल की उम्र में उनका सिलेक्शन भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में किया गया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके सिलेक्शन का श्रेय राज सिंह डूंगरपुर को दिया जाता है जो कि उस समय की सेलेक्टर थे तेंदुलकर नवंबर 1989 में सिर्फ 16 साल और 205 दिनों की उम्र में कराची में पाकिस्तान के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की इससे पहले भी भारतीय चयन समिति ने वेस्टइंडीज के दौरे के लिए सचिन के सलेक्शन की इच्छा जताई थी लेकिन वह नहीं चाहते थे कि सचिन को इतनी जल्दी वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजों का सामना करना पड़े और इसीलिए उन्होंने सचिन को थोड़ा और समय दे दिया था कराची में सचिन ने इंडिया क्रिकेट टीम की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच खेलते हुए 15 रन बनाए इसी सीरीज के एक मैच में सचिन की नाक पर गेंद लग गई थी जिसकी वजह से उनकी नाक से खून आ गया लेकिन फिर भी वो रुके नहीं पूरा मैच खेला उस मैच में उन्होंने 54 रन बनाए थे सचिन ने 1992-93 में अपना पहला घरेलू टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ भारत में खेला जो उनका टेस्ट कैरियर का 22 वा टेस्ट मैच था इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट मुकाबलों में भी सचिन का प्रदर्शन बहुत ही जबरदस्त रहा और उन्होंने कई टेस्ट शतक भी जड़े हालांकि सचिन को एक दिवसीय मैच में अपना पहला शतक लगाने के लिए उन्नासी मैचों का इंतजार करना पड़ा था लेकिन एक बार लय मैं आने के बाद सचिन ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी जादुई बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत की सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया सचिन एकमात्र खिलाड़ी हैं जिनके खाते में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर में 100 शतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड है उन्होंने रिकॉर्ड 51 शतक टेस्ट क्रिकेट में और 49 शतक वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में बनाए हैं एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में दोहरा शतक जड़ने वाले वह पहले खिलाड़ी हैं साथ ही साथ सचिन सबसे ज्यादा वन डे इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेलने वाले भी खिलाड़ी है उन्होंने कुल 463 वनडे खेले हैं सचिन को क्रिकेट में उनकी अद्भुत योगदान के लिए उन्हें बहुत सारे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है 1997-98 में उन्हें खेल जगत के सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया उसके बाद 1999 में उन्हें पदम श्री और 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है 2013 में भारतीय डाक विभाग ने उनके नाम का डाक टिकट जारी किया इस सम्मान से सम्मानित होने वाले वह एकमात्र क्रिकेटर है 2014 में सचिन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी है वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी के लगभग सभी रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद 30 दिसंबर 2012 को सचिन ने वनडे क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी और फिर 16 नवंबर 2013 को अपने घरेलू मैच वानखेड़े स्टेडियम में उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला इस टेस्ट मैच को जीतकर भारतीय टीम ने उन्हें भावपूर्ण विदाई दी अगर सचिन की पर्सनल लाइफ की बात करें तो 1995 में अंजलि तेंदुलकर से शादी की उनके दो बच्चे भी हैं जिनका नाम सारा और अर्जुन है सचिन अपने शाम और सरल स्वभाव के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है गुस्से में आकर भी कोई टिप्पणी करने की बजाय किसी टिप्पणी का जवाब अपने बल्ले से देने में विश्वास रखते थे दोस्तो सचिन ने क्रिकेट में भगवान का दर्जा अपनी मेहनत अपनी कोशिश अपनी लगन से हासिल की उन्होंने क्रिकेट को इस तरह खेला कि वह सिर्फ खेलना रहकर एक प्रेरणा बन गया आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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February मैं सिर्फ 28 Days ही क्यों होते है?

Why is February only 28 days?



आज मैं आपको बताऊंगा कि फेब्रुअरी में 28 डेज क्यों होते हैं अगर ब्लॉग अच्छा लगे तो ब्लॉग सब्सक्राइब करेगा उसके साथ ब्लॉग को इतना शेयर करेगा आपके सारे फ्रेंड के साथ ताकि उनको भैया पता चले कि फेब्रुअरी में 28 डेज क्यों होते हैं ना इसमें आपको बताऊंगा फेब्रुअरी में 28 डेज क्यों होते उसके बारे में समझते 29 कहां से आता है तो होता क्या है कि जो हमारा अर्थ है वह सन के आसपास घूम रहा है घूम रहा है घूम रहा है इसको पूरा ऑर्बिट इसका कंप्लीट करने में लग जाता है 360 5.24 डेस यानी अगर मिस कर रहा हूं प्लीज अर्जेंट होता है 365 पॉइंट 25 डेट मतलब 0.25 206 घंटे साल में 6 घंटे पीछे हो जाते अगर हम फरवरी में जो है अगर 28 डेस के सबसे चले तो ऐसे ही करते करते 4 साल में हम एक दिन बना लेते वह एक दिन हम पूरी के 29 डे में ऐड कर देते ताकि हम सिनकोनाज मुझे चारों तरफ से और हमारी लाइफ से जो 4 सालों में हमने एक दिन गवा दिया वह हमारी लाइफ में वापस आ जाए यह सिंक्रोनाइजेशन के लिए 29 जो है वह लीप ईयर कहा जाता है जो कि 4 साल में एक बार आता है यह तो बात हो गई 29 की लेकिन अब जो असली क्वेश्चन है वह फरवरी में ही क्यों मार्च में क्यों नहीं अप्रैल में क्यों नहीं पाया इसके लिए चलना पड़ेगा बहुत पीछे जब भी कैलेंडर बना था तुझे बना था रोमन के द्वारा रोमन की जो पहले क्यों थे उनके सामने चुनौती है की बहुत बार बार फेस्टिवल आ रहे हैं बार-बार सीजन चेंज हो रहा है तो इन लोगों को जोड़ें वह मैपिंग करना था कि कौन से मंथ में कौनसा सीजन अरे कौन सा फेस्टिवल आ रहा है तीन लोगों ने बैठक 1 मार्च से लेकर दिसंबर तक 10 मंथ का पहला कैलेंडर बनाया और इनका जो कैलेंडर है वह मार्च से स्टार्ट होता था दिसंबर तक खत्म होता था मतलब जनवरी और फरवरी तो था ही नहीं तो इन लोगों ने दिमाग लगाकर कुछ महीनों में 30 डेज दीजिए कुछ महीनों में 31 डेज दे दी के बाद चुनौती है आज आई क्यों नहीं 2 महीने छोड़े इसलिए छोड़ दिया कि वह 2 महीने में लोग काम नहीं करते थे कुछ काम ही नहीं करते तो उसको केलकुलेट क्यों करना तुम उनको बाद में पता चला कि जब मैं गर्मी आ रही थी दो-तीन साल बाद उस मार्च में तो भैया ठंडी आने लगी तुमको समझ आएगी जो 2 महीने में छोड़ रहे हैं वह गलत छोड़ रहे हैं घुमा फिरा के पूरे साल में यह 61.25 भेजो है वह भूल जाते देखा जाता उसके बाद एक नया राजा आया रूस का उसने क्या किया उसने बोला कि भैया नंबर है वह बैड लक होता है जहां जहां अपने 3030 दिन दिया जिसमें सब में से एक-एक दिन हटा दो ऐसे करते-करते ने मार्च से दिसंबर तक जो कैलेंडर बनाया उसमें दिन और कम कर दिया को टोटल हो गए 298 अब हुआ क्या किसने बोला कि भैया जो मुंह है हमारा मून जो है वह अलग अलग तरीके से हम को दिखता है 29.58 लगते थे छोटे मून को खत्म होकर वापस छोटा होने में मतलब उसको ऑर्बिट में घूमने में लोगों ने 12 महीने का कैलेंडर बनाया 29.5 को 24:00 मल्टीप्लाई कर दिया तो इनके पास आ गए 354 डेट भैया फिर से युवन नंबर आ गया तूने एक दिन और ऐड कर दिया तो 355 डिश बन गए तो इस के चक्कर में जनवरी को मिल गया उसके बाद जो आखिरी महीने में जोड़ा था जिसको कहते हैं वह उसको मिले 28 + कि यह सब करने के बाद भी इनके 10 दिन बाद जाते थे पूरे साल में समझ आया भैया जब मार्च में ठंडी आ रही थी अब मार्च में गर्मी आने लगी उसके बाद जो है वह थर्ड किंग है उसने बोला भैया जनवरी और फेब्रुअरी जो है उस को आगे ले कर चलो कि मार्च के पहले सब लोग फालतू बैठते हैं विंटर आता है कुछ काम धंधा नहीं करता उसको आगे लगा दो सुबह से बनने के बाद जो कैलेंडर आया उसमें बस एक ही डाउट था कि भैया जो 4 साल में 1 दिन बचा है उसका क्या करें उसके लिए उसने बोला कि देखो सारे महीने जो है वह 30,31 चली रहे तो फिर भी और एक ऐसा महीना है जिसमें 28 डेज है तो क्यों ना उसको एक छोटा सा और बढ़ा दे 29 जो है लीप ईयर बोलकर 4 साल में एक बार आता है तो घुमा फिरा के हमको तो कुछ नहीं करना पड़ा जब भी हम आए हैं इस दुनिया में हमको कैलेंडर बना बनाया मिला कैलेंडर मिला उसको फॉलो कर रहा है अब 1 दिन ज्यादा हो एक दिन कम हो हम को तो कोई लेना देना नहीं है हम तो हमारी बिंदास लाइफ जी रहे हैं कैलेंडर से रिलेटेड जानकारी चाहिए तो नीचे कमेंट करिए मैं उसका रिप्लाई जरूर दूंगा


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एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में - Jankari Dunia

एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में | Elon Musk Success Story In Hindi

एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में | Elon Musk Success Story In Hindi
Elon Musk


   खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं यह वाक्य आज से सालों पहले महात्मा गांधी ने कहे थे और इन वाक्य  को अगर किसी व्यक्ति ने हकीकत में बदला है तो वह है एलोन मस्क,एलोन मस्क अफ़्रीकी मुल्क के इनवेस्टर, इंजीनियर और बिजनेसमैन है और आज के समय में भी पूरी दुनिया में अपनी दूरगामी सोच की वजह से काफी प्रसिद्धि पा चुके हैं उनकी सोच हमेशा से ही इंसानों की परेशानियों को दूर करने पर केंद्रित रही है और इसी सोच की वजह से मैं पूरी दुनिया भर में जीनियस एंटरप्रिनिअर के नाम से भी जाने जाते एलोन आज के समय में फ़ोर्ब्स के अनुसार दुनिया के इकिस्वे सबसे धनी व्यक्ति है लेकिन दोस्तो  कोई भी व्यक्ति जन्म से अमीर नहीं होता इस पायदान पर पहुंचने के लिए उसे ना जाने कितनी मेहनत करनी पड़ती है ठीक उसी तरह ही एलोन मस्क ने भी बचपन से ही काफी मेहनत की और बहोत सारे संघर्षों के बाद आज लाखों युवाओं के लिए इंस्पिरेशन बन चुके हैं तो चलिए दोस्तों एलोन मस्क  के मोटिवेशनल लाइफ जर्नी को हम शुरू से जानते हैं |

    तो दोस्तों कहानी की शुरुआत होती है आज से करीब 46 साल पहले से जब साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया शहर में 28 जून 1971 को एलोन मस्क का जन्म हुआ उनके पिता का नाम एरोल मस्क था और वे  एक इंजीनियर होने के साथ-साथ एक पायलट भी थे और उनकी मां का नाम मेंही मस्क था  जो कि एक मॉडल और डाइटिशियन थी एलोन मस्क बचपन से ही पढ़ने में काफी दिलचस्पी रखते थे और हमेशा ही किताबों के आसपास देखे जाते थे और सिर्फ 10 साल की उम्र में उनको कंप्यूटर से काफी इंट्रेस्ट हो गया था और सिर्फ 12 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीकर एक ब्लास्टर नाम का गेम बना डाला जिसे कि उन्होंने $500 की कीमत पर PC एंड ऑफिस टेक्नोलॉजी नाम की एक कंपनी को बेच  दिया और यहीं से एलोन मस्क की  प्रतिभा साफ साफ झलकती लगी थी वह बचपन में आयजक,असीमो की किताबें पढ़ा करते थे और शायद यही से उनको टेक्नोलॉजी के प्रति इतना लगाव हो गया बचपन में एलोन मस्क को स्कूल के दिनों में बहुत परेशान किया जाता था एक बार तो कुछ लड़कों के ग्रुप में उनको सीढ़ियों से धक्का दे दिया और उनको तब तक मारा जब तक की वह बेहोश नहीं होगये  इसके लिए उन्हें कई दिनों तक हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा था लेकिन दोस्तों एलोन मस्क को भले ही बचपन में इतनी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा पर आगे चलकर उन्होंने मानवता के हित में काफी सराहनीय काम किया 17 साल की उम्र में एलोन मस्क ने क्वीन यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की और वहां पर 2 साल पढ़ने के बाद मैं यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया ट्रांसफर हो गए जहां उन्होंने 1992 में फिजिक्स में बैचलर ऑफ साइंस डिग्री ली 1995 में एलोन मस्क PhD करने के लिए कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गए लेकिन वहां पर रिसर्च शुरू करने की मात्र 2 दिन के अंदर ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और एक सफल व्यवसाई बनने के लिए अपने कदम बड़ा लिए 1995 में अपने भाई के साथ एलोन मस्क ने  जीप टू नाम की एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की जिसे कि आगे चलकर कॉन्पैक्ट ने 307 मिलियन डॉलर जैसी बड़ी रकम देकर खरीद ली और इसके बिकने के बाद जिप टू में अपने साथ परसेंट के शेयर से एलोन मस्क को कुल 22 मिलियन डॉलर मिले और फिर 1999 में इन पैसों में से 10 मिलियन डॉलर का इन्वेस्ट करते हुए एलोन मस्क ने  x.com की स्थापना की जो कि एक फाइनेंसियल सर्विस देने वाली कंपनी थी और एक साल बाद यह कंपनी कॉन्फ़िनिटी  नाम की एक कंपनी के साथ जुड़ गई और दोस्तों बता दो कि कॉन्फ़िनिटी कंपनी की एक मनी ट्रांसफर सर्विस हुआ करती थी जिसे कि अब हम पे पाल के नाम से जानते हैं और तभी से लेकर अब तक पे पाल  मनी ट्रांसफर का काफी लोकप्रिय माध्यम रहा है 2002 मे  ebay ने पे पाल को 1.5 मिलियन डॉलर की अविश्वसनीय रकम देकर खरीद लिया और इस डील के बाद एलोन मस्क को 165 मिलियन डॉलर मिले और दोस्तो बता दू  कि एलोन मस्क पे पाल के सबसे बड़े शेयर होल्डर थे  और फिर 2002 में अपने जमा किए हुए पैसों में से 100 मिलियन डॉलर की बड़ी रकम के साथ एलोन मस्क ने  स्पेस एक्स नाम की एक कंपनी की स्थापना की और यह कंपनी आज के समय में स्पेस लॉन्चिंग व्हीकल बनाने में कार्यरत है और एलोन मस्क ने एक
एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में | Elon Musk Success Story In Hindi
SpaceX, California, United States
इंटरव्यू में बताया कि 2030 तक इंसानों को मंगल ग्रह पर बसाने की पूरी तैयारी में है 2003 में एलोन मस्क ने  दो लोगों के साथ मिलकर टेस्ला इन नाम की एक और कंपनी की शुरुआत की और 2008 के बाद से ही वे टेस्ला के सीईओ के तौर पर काम कर रहे हैं और जो शायद आपको तो पता ही होगा कि टेस्ला की खासियत इसकी लाजवाब इलेक्ट्रिक कार और फिर 2006 में एलोन मस्क ने अपने कजन की कंपनी सोलर सिटी को फाइनेंसियल केपिटल मुहैया करवा कर इसे शुरू करने में अहम रोल अदा किया और फिर 2013 में सोलर सिटी यूनाइटेड स्टेट में सोलर पावर सिस्टम मुहैया कराने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गयी है और फिर आगे चलकर 2016 में टेस्ला सोलर  सिटी को अपने अंतर्गत लेलिया और आज के समय में सोलर सिटी पूरी तरह से टेस्ला लाइन के अंतर्गत ही काम करती है दिसंबर 2015 में एलोन मस्क ने  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिजल्ट कंपनी की शुरुआत की जिसका नाम ओपन ए आय  रखा गया जिसके तहत वह मानवता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को फायदेमंद और सुरक्षित बनाना चाहते हैं 2016 में एलोन मस्क न्यू रनिंग नाम की एक कंपनी के को-फाउंडर बने और यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ह्यूमन ब्रेन को जोड़ने के काम में लगी हुई है तो कुल मिला जुला कर दो तो देखा ना आपने एलोन मस्क किस तरह से अलग-अलग तरह के बहुत सारे कामों में लगे हुए हैं और इस बात से उन्होंने साबित कर दिया है कि उनके जैसा सोच रखने वाले व्यक्ति हैं कुछ बड़ा कर पाते हैं वैसे तो आज मैं एक जानी मानी हस्ती हैं और दुनिया भर में नाम कमा चुके हैं लेकिन उनका मानना है कि दुनिया में अभी भी बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिसे कि बेहतर करके मानव के हितों में काम किया जा सकता है उम्मीद है कि आप को एलोन मस्क की यह लाइफ स्टोरी जरूर पसंद आई होगी


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संजय दत्त का जीवन परिचय - नायक से खलनायक तक का सफर - Jankari Dunia

संजय दत्त का जीवन परिचय - नायक से खलनायक तक का सफर | Introduction of Sanjay Dutt - Journey from Hero to Villain

Sanjay Dutt Jankari Dunia
Sanjay Dutt Image by gettyimages


          दोस्तों वक्त और हालात एक ऐसी चीज है जो कभी भी किसी को नायक और किसी को खलनायक बना सकती है, और दोस्तों आज की हमारी कहानी भी एक ऐसे ही एक्टर की है जिसके बुरे वक़्त और हालातों ने उसे रियल लाइफ का विलेन बना दिया हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर संजय दत्त की जो कि अब तक लगभग 190 फिल्मों में पुलिस गैंगस्टर और हीरो की तरह ही कई सारे अलग-अलग किरदार निभा चुके हैं और इन रोल्स ने उन्हे लोगों के बीच काफी फेमस भी किया है हालांकि दो तो संजय दत्त बॉलीवुड में जितनी अच्छी और सफल एक्टर माने जाते हैं उतने ही विवादों में उनका जीवन भी रहा है और संजय दत्त की कहानी के ऊपर ही 29 जून 2018 को उन की बायोपिक संजू भी आ रही है और इस बायोपिक की शूटिंग शुरू होने के बाद से ही यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है साथ ही उनका रियल लाइफ किरदार निभा रहे हैं रणबीर कपूर ने इस बायोपिक में अपनी शानदार एक्टिंग से लोगों का मन मोह लिया है तो चलिए दोस्तों अपनी लाइफ में काफी उतार-चढ़ाव देख चुके संजय दत्त की पूरी लाइफ जर्नी को हम शुरू से जानते हैं तो दोस्तों इस कहानी की शुरुआत होती है 29 जुलाई 1959 से जब मुंबई स्टेट में संजय दत्त का जन्म हुआ उनके पिता का नाम सुनील दत्त था जोकि बॉलीवुड के ही एक जाने-माने ऐक्टर थी साथ ही उनकी मां का नाम नरगिस और वह भी भारतीय सिनेमा जगत में किसी पहचान की मोहताज नहीं  संजय दत्त ने अपने शुरुआती पढ़ाई द लॉरेंस स्कूल से की और फिर कॉलेज की पढ़ाई के लिए वह एलफिंस्टन कॉलेज गए  वैसे तो संजय दत्त ने 1972 में ही अपना फिल्मी करियर रेशमा और शेरा नाम की मूवी में एक छोटा सा रोल अदा करके शुरू कर दिया था लेकिन अपना खुद का नाम बनाने में और बतौर लिड  एक्टर  उनकी फिल्म आने में कई साल लग गए दोस्तों  संजय दत्त भले ही सुनील दत्त और नरगिस के बेटे थे लेकिन एक्टिंग में अगर उन्हें लंबे समय तक अपना नाम बनाना था तो स्क्रीन पर अच्छी परफॉर्मेंस तो दे नहीं थी और फिर 1972 में एक छोटे से रोल के  बात से उन्होंने अपनी एक्टिंग के  स्किल्स को  और भी बेहतर किया परंतु यहां मेहनत दिखाई दी 1981 की फिल्म रॉकी से जोकि बॉक्स ऑफिस पर बहुत ही बड़ी हिट साबित हुई और अपनी पहली मूवी सही संजय दत्त ने बता दिया था कि मैं लंबी रेस के घोड़े है  हालांकि इस मूवी के रिलीज होने से पहले ही संजय दत्त की मां याने की नरगिस की मृत्यु हो गई और इस घटना से संजय दत्त को बहुत ही गहरा सदमा लगा यहां तक की उन्होंने इस गम से उभरने के लिए ड्रग्स  तक का सहारा लिया और कब उनकी यह मजबूरी आदत में बदल गई उन्हें पता भी नहीं चला और इसी बीच उन्हें ड्रग्स रखने  के जुर्म  में पहली बार जेल भी जाना पड़ा हालांकि उनके पिता ने सही समय पर उनको टेक्स्ट ऑफ केक रियाद में भर्ती करवा दिया और वहां पर 5 महीने बिताने के बाद संजय दत्त ने ड्रग्स की लत से निजात पा ली और फिर अपने काम पर कंसंट्रेट करते हुए 90 के दशक तक वह एक जाने-माने ऐक्टर बन चुके थे और लोगों ने हमारे तीन हीरो का किरदार निभाते हुए देखकर खुशी से झूम जाते लेकिन दोस्तों किसी भी व्यक्ति का समय हमेशा ही एक जैसा नहीं रहता और कुछ ऐसा ही हुआ संजय दत्त के साथ भी 1993 में मुंबई में अलग-अलग जगहों पर 12 बम ब्लास्ट में इसमें कुल 257 मासूमों की जान चली गई और लगभग 713 लोग घायल हुए और इन हम लोगों ने ना केवल मुंबई को बल्कि पूरे देश को जला कर रख दिया और फिर संजय दत्त का नाम  मुंबई में हुए बम ब्लास्ट में उछाला गया और यह कहा गया कि संजय दत्त के पास जो हथियार है वह मुंबई के हम लोग के लिए जो जिम्मेदार आतंकी है उनके पास से आए हैं और फिर 1993 में ही गैर कानूनी हथियार रखने के जुर्म में उन्हें जेल भेज दिया गया और समय बीतने के साथ ही देखते ही देखते लोगों का ऑन स्क्रीन हीरो अब रियल लाइफ का विलेन बन चुका था पर हमले के कुछ समय के बाद ही संजय दत्त की Khalnayak मूवी भी रिलीज हुई और फिर जेल जाने के बाद सेवा अगले 4 साल तक फिल्मों में काम नहीं कर सके हालांकि 1993 में जेल जाने के बाद 1995 में उन्हें बेल मिल गई और फिर 1997 से उन्होंने दोबारा फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया हालांकि इस  लंबे गॅप में भी उनकी पहले से बनाई हुई फिल्में रिलीज होती रही और फिर वापसी  के बाद 1999 में उन्होंने वास्तव और दाग द फायर की तरह ही कई सारी सुपरहिट मूवीस दी और फिर आगे भी उन्होंने मिशन कश्मीर जोड़ी नंबर वन कांटे मुन्ना भाई Mbbs शादी नंबर वन और लगे रहो मुन्ना भाई की तरह ही बहुत सारी मूवीस में काम किया बल्कि दोस्तों मैंने अभी आपको जो मूवीस बताया है वह काफी कम है इसके अलावा भी उन्होंने सैकड़ों मूवीज में काम किया है इसका अलग अलग नाम लेना इस ब्लॉग  में पॉसिबल नहीं है हालांकि इसी बीच 2006 और 2007 में मुंबई बम ब्लास्ट के केस के चलते ही उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा लेकिन इस बार उन्हें जल्दी बेल मिल गई लेकिन इसी समय के लिए थोड़ी और राहत की खबर तबाई जब उन्हें आतंकवाद के केस में निर्दोष पाया गया कि अवैध हथियार रखने के जुर्म में भी अभी भी दोषी थी और दोस्तों जैसा कि संजय दत्त शुरू से ही कहते हैं कि एक आतंकवादी नहीं है और समय के साथ-साथ यह भी सिद्ध हो गया हलाकि अगले कुछ साल बीतने के बाद 2013 में अवैध हथियार रखने के जुर्म में 5 साल कि उन्हें सजा सुनाइए गयी लेकिन वह कुछ समय पहले भी जेल में बिता चुके थे और इसीलिए सजा के बाद से उन्हें जेल में 42 महीने ही बिताने थी हालांकि जेल में रहते हुए संजय दत्त ने बहुत ही अच्छा बर्ताव किया और जेल के सारे नियमों का सही से पालन किया जिसकी वजह से उनकी सजा हमें 102 दिन और भी कम हो गए पर इस तरह से 25 फरवरी 2016 को वापिस सजा काट कर बाहर आ गए और जैसा कि मैंने आपको पहले ही बताया कि संजय दत्त की लाइफ के ऊपर पुल की बायोपिक 29 जून 2018 को रिलीज होने वाली है और इस मूवी में संजय दत्त का किरदार निभाते नजर आ रहे हैं बॉलीवुड के मशहूर एक्टर रणबीर कपूर और दोस्तों अगर संजय दत्त के पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने कुल 3 बार शादियां की है पहले 1987 में रिचा शर्मा से दूसरी 1998 में रिया पिल्लई से और तीसरी 2008 में मान्यता दत्त और अंत  में बस मैं यही कहना चाहता हूं कि एक तरह पर भले ही संजय दत्त ने कोई जुर्म किया हो पर वह आज अपनी जुर्म की सजा पूरी कर चुके हैं और कहते हैं कि अगर व्यक्ति अपने कर्मों की सजा काट ले फिर वह दोषी नहीं रहता उम्मीद करते हैं कि आपको संजय दत्त की यह कहानी जरूर पसंद आई होगी

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दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी - Jankari Dunia


दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी |

All Information About World War 2





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दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी



        नमस्कार दोस्तों जानकारी दुनिया में आपका स्वागत है आज हम बात करेंगे उस महायुद्ध की जिस की घटनाओं ने दुनिया के हर पहलू को बदल कर रख दिया जो इतिहास का एक कलंक है और खुद अपने आप में एक इतिहास है जिसके बारे में जानने के लिए दुनिया का हर इंसान उत्सुक रहता है जी हां आज हम बात करेंगे दूसरे विश्वयुद्ध की दूसरे विश्वयुद्ध को ग्लोबल वॉर या टोटल वॉर कहा जाता है ग्लोबल या टोटल वह इसलिए क्योंकि इस विश्व युद्ध में सिर्फ सैनिक ही नहीं बल्कि देश के आम आदमी भी शामिल थे जब पहले वॉर होती थी तो सेना ही आपस में लड़ते थे लेकिन इस विश्वयुद्ध में सामान्य जनता को भी टारगेट किया गया था किसी भी देश में अपने दुश्मन देशों में घुसकर आम जनता पर गोले बरसाए थे उन पर बम फेंके थे और उन पर मिसाइलें दागी थी इसलिए इस विश्व युद्ध में कोई भी इंसान ऐसा नहीं था जिस पर जान का खतरा ना हो इसी कारण इसे टोटल वार या ग्लोबल वॉर भी कहा जाता है यह युद्ध 1939 से लेकर 1945 तक चला था और इस युद्ध में दो मेन पावर थे एक था एग्जिट पावर जिसमें जर्मनी इटली जापान हंगेरी रोमानिया और बुल्गारिया जैसे देश शामिल थे जबकि दूसरी तरफ एलियन पावर के निशान थे जिसमें यूएस ब्रिटेन फ्रांस यूएसएसआर ऑस्ट्रेलिया ब्राजील कैनेडा चाइना डेनमार्क क्रिस नेदरलैंड इंग्लैंड न्यूजीलैंड पोलैंड जैसे देश शामिल थे यहां पर याद रहे कि इटली पहले विश्वयुद्ध में एलियंस पावर में था जबकि वह दूसरे विश्वयुद्ध में एग्जिट पावर में शामिल हो गया था दूसरे विश्वयुद्ध में उस वक़्त की पृथ्वी की जनसंख्या के 3% लोग मारे गए थे करोड़ों लोग घायल हुए थे और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ था जैसे कि हमने हमारी आगे की डॉक्यूमेंट्री में जाना कि हर एक घटना दूसरी एक घटना को अंजाम देती है दूसरे विश्वयुद्ध होने के पीछे भी कई घटनाएं कारण पूत थे उनमें से एक सबसे बड़ा कारण था खुद पहला विश्व युद्ध तो आइए आरंभ करते हैं दूसरे विश्वयुद्ध का जैसे कि आगे हमने जाना पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पूरी तरह से घुटनों पर आ गया था और फ्रान्स  तथा ब्रिटेन ने विवादित वर्सेल्स करार के जरिए जर्मन त्वचा की स्थिति बद से बदतर कर दी थी और जर्मन में रोश और आक्रोश पनपने लगा था उन प्रजाजनों में से एक था अडोल्फ़ हिटलर ने नाजी  के जरिए जर्मनी की सत्ता हासिल की और दुश्मन देशों से बदला लेने का प्लान बनाया हिटलर ने दुश्मन देशों के द्वारा हाथी आए हुए जर्मन प्रदेशों को एक-एक कर वापस ले लिया और आखिरकार जर्मनी का सबसे बड़ा भू भाग जो पोलैंड में था उस पर आक्रमण कर उसे ले लिया गया मगर हिटलर इतने से संतोष मानने वाला नहीं था और अब वह दुश्मन देशों को अपने दावे में करना चाहता था जिसके लिए उसने पोलैंड देश पर हमला कर दिया दिन था 1 सितंबर 1939 समय सुबह के 4:45 और यह था दूसरे विश्वयुद्ध का आरंभ 1 सितंबर की सुबह 4:45 पर जर्मनी ने जिस महा युद्ध का आरंभ किया उसके कुछ ही घंटों में लगभग 1500000 जर्मन नाजी सैनिक पोलैंड के अंदर घुस गए और वह एक महीना होते होते तो पूरे पोलैंड देश को जीत लिया पोलन पर हमला होने के हालात में मदद का वायदा देने वाले फ्रांस और ब्रिटेन भी इन हालात में कुछ ना कर सके पोलैंड को जीतने के बाद लगभग 6 महीने तक हिटलर शांत रहा उसने कोई भी प्रतिक्रिया कि नहीं लेकिन उसका अगला टारगेट फ्रांस और ब्रिटेन थे क्योंकि यही वह देश है जो जर्मनी की दयनीय स्थिति के लिए जवाबदार थे और वर्सेस करार के नायक दूसरे विश्व युद्ध में हिटलर जर्मनी सकता को पूरे यूरोप में फैलाना चाहता था और वैसी ही सोच रखने वाला एक और तानाशाह इटली में पैदा हो गया था जो था मुसोलिनी मुसोलिनी इटालियन सत्ता फिर से यूरोप में खड़ी करना चाहता था और रोमन राज्य से हुकूमत वापस लाना चाहता था वह तीसरी और पूर्व में जापान लड़ रहा था जापान एशिया में अपनी हुकूमत बनाना चाहता था और पूर्व तथा दक्षिण एशिया के देशों को जीतकर उन पर अपनी हुकुमत कायम करना चाहता था तो इस तरह साम्राज्यवादी नीतियों को ध्यान में रख यह तीन देश विश्व युद्ध लड़ रहे थे अब हिटलर बहुत ज्यादा ही महत्वकांक्षी बन चुका था वह सभी देशों पर जर्मन राज लाना चाहता था फ्रांस और ब्रिटेन पर हमला करने के लिए उसे और ज्यादा शस्त्रों की ओर डिफेंस पावर की जरूरत थी इसलिए उसने फिलहाल वह हमला स्थगित रखा और उत्तरी यूरोप के एक केंद्रीय विदेश नोर्वे  पर हमला कर दिया 9 अप्रैल 1940 के दिन लगभग 15000 सैनिक 1000 फाइटर प्लेन और 28 सबमरीन को भेजकर नॉर्वे को जीत लिया और नॉर्वे और जर्मनी के बीच पड़ने वाले देश डेनमार्क को भी अपने दावे में कर लिया इतना ही नहीं कुछ ही महीनों में तो नीदरलैंड लेक्सेबेर्ग और बेल्जियम तीनो देशो पर बारी-बारी हमला कर जर्मनी में विलीन कर दिया 1940 का जून महीना आते-आते हिटलर को लगा के अब उसके पास डिफेंस पावर के लिए उत्पादित शास्त्र पर्याप्त मात्रा में जमा हो गए हैं इसलिए 5 जून 1940 को हिट लाने लगभग
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दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी
1500000 नाजी सैनिकों को भेजकर फ्रांस पर आक्रमण कर दिया उस समय फ्रांस के पास 800000 सैनिक थे लेकिन उसके सामने 1500000 नाजी सैनिक 2010 टैंक और 1500  फाइटर प्लेन थे जिस को उस वक्त हरा पाना प्रांत के बस में नहीं था और महेश 15 दिन होते होते तो फ्रांस का काम तमाम कर दिया फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर जर्मनी को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी वह दिन आज भी हिटलर भुला नहीं था यहां पर इतिहास में अपने आप को फिर दोहराया हिटलर ने फ्रांस के वही कैंपिंग के जंगल में वही ट्रेन बुलवाई जिसमें लगभग 21 साल पहले फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मन सरकार से शरणागति पत्र पर दस्तखत करवाए थे हिटलर ने आज इतने सालों बाद फिर से कैंपिंग के जंगलों में ट्रेन में बैठकर फ्रांस को शरणागती पत्र पर दस्तखत करवाएं अब स्थिति यह थी कि जर्मन सेना लगभग पूरे यूरोप को अपने ताबे में ले चुकी थी बस अब सिर्फ एक ही देश बाकी था जो उनके सामने झुका नहीं था वह था द ग्रेट ब्रिटन हालांकि ब्रिटेन चारों ओर समुंदर से गहरा देश है इसलिए अब तक वह अवैध रह गया लेकिन 1940 में हिटलर ने समुद्री मार्ग से ब्रिटेन पर हमला करने की ठान ली लेकिन उसके इस विचार में बाधा बना उसका सेना अध्यक्ष हिटलर की सेना अध्यक्ष ने उस वक्त यह कहकर युद्ध को टाल दिया कि ब्रिटेन की वायुसेना बहुत मजबूत है और वह लोग हम पर समुद्र में हवाई हमला कर सकते हैं इसलिए हिटलर ने कुछ समय प्रतीक्षा की और अपनी वायु सेना को और मजबूत बना लिया ताकि जब वो ब्रिटेन पर हमला करे तो जर्मन वायु सेना उस पर काउंटर अटैक कर सके और कुछ ही महीनों बाद जर्मनी और ब्रिटेन के बीच घमासान युद्ध हुआ जिसे बैटल ऑफ ब्रिटेन भी कहा जाता है इस युद्ध में ब्रिटेन के 1000 और जर्मनी के लगभग 1800  फाइटर प्लेन निस्तनाभूत हो गए महीनों तक चले बैटल ऑफ ब्रिटेन के बाद हिटलर का धैर्य टूट गया हालांकि आधे से ज्यादा यूरोप पर जर्मनी की हुकूमत थी पर कुछ समय और हिटलर यह युद्ध जारी रखता तो ब्रिटेन को आज नहीं तो कल हारना ही पड़ता लेकिन कूटनीति में हिटलर इतना अच्छा नहीं था जितना को राजनीति में था और वह न करने वाली 3 बड़ी गलतियां कर बैठा उस की सबसे बड़ी एक फूल तो यह थी कि उसने ब्रिटेन के साथ युद्ध को स्थगित कर दिया और ब्रिटेन को बाद में हराने की सोचने के बाद वह फिलहाल यूरोप के अन्य देशों पर हुकूमत करने की सोचने लगा होटल की  दूसरी और सबसे बड़ी अक्षम में गलती यह थी कि उसने रसिया के साथ बिना कोई कारण ही युद्ध छेड़ दिया रसिया के साथ युद्ध करने के लिए हिटलर ने 3000000 सैनिक 7000 टैंक और 4000 फाइटर प्लेन रवाना किए उस समय जर्मन नाजी सैनिक रशिया में कोशिश की लेकिन बाद में वह रशियन सैनिकों के सामने और रसिया के ठंड मौसम के सामने नहीं टिक पाए और लगभग 909000 सैनिक मारे गए और रशियन सैनिक जर्मन नाजी सैनिकों को खदेड़ते हुए जर्मनी के बॉर्डर तक आ गए हिटलर ने तीसरी भूल ये  करदि  कि उसने बिना कोई वजह अमेरिका से युद्ध डिक्लेयर कर दिया जबकि विवादित वर्सेल्स करार के वर्क और उससे पहले अमेरिका का रवैया जर्मनी के लिए शौक था और अमेरिका और जर्मनी के बीच कोई दुश्मनी भी नहीं थी जापान ने 7 दिसंबर 1941 के दिन अमेरिका के पर्ल हर्बल पर हमला किया उसके चार ही दिन बाद हिटलर ने अमेरिका के साथ युद्ध की घोषणा कर दी हिटलर ने शायद यह सोचा होगा कि अग्नि एशिया में जापान ब्रिटेन के सामने लड़ रहा है जो जर्मनी का दुश्मन था इसलिए दुश्मन का दुश्मन दोस्त हुआ और अब जापान ने अमेरिका पर हमला कर दिया इस वजह से दोस्त का दुश्मन दुश्मन हुआ शायद इन सभी कारणों के चलते हड़बड़ी में हिटलर ने अमेरिका के साथ युद्ध डिक्लेयर कर दिया लेकिन इसके परिणाम जर्मनी और हिटलर के लिए बहुत घातक साबित हुए 6 जून 1944 के दिन अमेरिका ब्रिटेन और दूसरे मित्र राष्ट्रों की सेना यूरोप में घुस गई और जर्मनी पर हमला कर दिया जिसमें कयी नाजी सैनिक मारे गए और वर्सेस करार में हुए अत्याचार का बदला लेने वाला जर्मनी फिर से घुटनों पर आ गया इधर 1946 में जर्मनी का खात्मा बुलाने से पहले ही इटली  को अपने कब्जे में कर लिया और मुसोलिनी को हिरासत में ले लिया महीनों तक चले संग्राम में जर्मनी की पीछे हट हुई थी क्योंकि एक और पश्चिम की तरफ से अमेरिका ब्रिटेन पर मित्र राष्ट्रों की सेनाएं जर्मनी पर हल्ला बोल रही थी जबकि दूसरी और पूर्व की तरफ रसिया की सेना राजधानी बर्लिन की ओर बढ़ रही थी इन हालात में अब जर्मनी की हार और तानाशाह हिटलर का अंत निश्चित था हिटलर की अपने अंतिम दिन बरलिन के सचिवालय के नीचे बने ब्यूरो बनकर कहे जाने वाले अपने आवास स्थान में गुजारे अरे फुरो  नाम की यह बंद कर दी तो बहुत मजबूत लेकिन बरलिन पर हो रहे तोप के गोलों ने बंक करके न्यू पर उसकी छत को हिला दिया था हिटलर को अब अपना अंत करीब लग रहा था उसने कुछ सर्वोच्च नाचे अफसरों को और अपने करीबी लोगों को बुलाया जितनी उस वक्त उसके साथ 26 लक्शरी अफसर पर इकत्तीस चौकीदार थे रशियन कचोरी पोर्ट दस्तावेजों में दर्ज है उस रिपोर्ट के अनुसार हिटलर ने अपने करीबी लोगों से कहा कि मुझे किसी भी हाल में दुश्मनों के हाथ पकड़े नहीं जाना है वह एक एक अफसरों को मिला लेकिन ज्यादा कुछ बातचीत नहीं की अब सब समझ गए थे कि आगे क्या होने वाला है दूसरे दिन 3 तारीख 30 अप्रैल 1945 हिटलर के जीवन का यह आखिरी दिन था दोपहर को युवा ब्राउन के साथ उसने लंच किया लगभग 2:00 बजे के बाद भोजन समाप्त करते हुए वह दोनों एक कमरे में गए जिसके बाहर एक चौकीदार टेंडर पोजीशन में पहरा दे रहा था कुछ समय बाद बंक करके उस कमरे में युवा ब्राइटनेस थायराइड की गोली खा ली और हिटलर ने वॉल्थ धर्म प्राण की अपनी ऑटोमेटिक पिस्टल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर दी और इसी के साथ तानाशाह हिटलर के चैप्टर का अंत हो गया हालांकि हिटलर की मौत के बारे में यह सर्वमान्य रिपोर्ट के अनुसार गठित हुई घटनाओं का ब्यौरा है लेकिन हीटर की मौत को आज भी एक मिस्त्री मारना चाहता है और उसके विषय में कई अलग-अलग रिपोर्ट अलग-अलग घटनाओं का जिक्र करती है सच्चाई आखिर जो भी हो लेकिन उस वक्त हिटलर का अंत हो गया और जर्मनी की पराजय इधर हिटलर की मौत और जर्मनी की हार के बाद यूरोप में तो लगभग दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हो गया लेकिन एशिया में जापान अभी भी युद्ध लड़ रहा था जापान ने मित्र देशों के नाक में दम कर रखा था उसने अमेरिका का भी काफी नुकसान किया और कई अमेरिकन तथा चाइनीस टापुओं को जीत लिया जापान उस वक्त कितना फॉर्म में चल रहा था कि वह हार मानने के लिए तैयार नहीं था और यहां पर मित्र देशों से हराकर किसी भी तरह युद्ध को खत्म करना चाहते थे इसलिए अमेरिका ने 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 2 दिन एक एक करके जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एटॉमिक बम से हमला किया जिसमें हजारों जापानी निर्दोष लोग मारे गए और उसके साथ ही दूसरे विश्वयुद्ध अंत हो गया लेकिन यहां पर सवाल यह है कि अमेरिका कई और तरीकों से भी जापान पर हमला कर उसे कंट्रोल में कर सकता था तो आखिर इतने भयानक एटॉमिक हमला करने की जरूरत क्या थी इसके ऊपर अमेरिका की भी अपनी सफाई है अपने जवाब है हर दूसरे विश्वयुद्ध का अंत चाहे जैसे भी हुआ बहुत ही बुरा हुआ इतनी खतरनाक युद्ध के बाद आखिरकार दुनिया को कुछ प्राप्त नहीं हुआ इस विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और यूएसएसआर का ठंडा विक्रम शुरू हुआ इस कोल्ड वॉर में तीसरे विश्वयुद्ध के संकेत भी दिखाई दे रहे थे लेकिन सुखद बात यह रही कि 1991 आते-आते गोल्ड वर्क खत्म हो गया और दुनिया ने चैन की सांस ली परंतु इस कोल्ड वॉर के चलते अमेरिका और रशिया में हजारों न्यूक्लियर वेपन खड़े कर दिए और न्यूक्लीयर से भी घातक हथियारों का उत्पादन किया वरना सिर्फ किन दो देशों ने बल्कि कई और देशों ने भी अपने आप को एडवांस और वेपनाइस  कर दिया आगे हम फिर हाजिर हो के तीसरे विश्वयुद्ध की सांकेतिक घटनाओं को लेकर और अगर तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो उस परिस्थिति में क्या हो सकता है उसके पूर्ण चित्र को लेकर अगर आपको यह डॉक्यूमेंट्री अच्छी लगी हो तो जानकारी दुनिया से  कनेक्टेड रहने के लिए आप हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें आगे फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए खुश रहिए धन्यवाद.