PUBG - के बारे में हिंदी में जानकारी



PUBG - के बारे में हिंदी में जानकारी



PUBG - के बारे में हिंदी में जानकारी
PUBG Game Banner
प्लेयर अननोन बैटलग्राउंड्स जिसे PUBG भी कहते हैं यह एक बहुत ही पॉपुलर गेम है इस गेम की शुरुआत हंड्रेड प्लेयर्स से होती है जिन्हें किडनैप करके एक रशियन आइलैंड में सरवाइव करना होता है प्लेयर्स पैराशूट की मदद से प्लेन से जम्प करते हैं अपने-अपने सरवाइवल के लिए इस गेम में प्लेयर्स को बाकी ९९ प्लेयर्स को हराना होता है चिकन डिनर के लिए जो कि इस गेम का रिवॉर्ड है यह एक ऐसा गेम है जो सभी जीतना चाहते हैं और इस गेम में प्लेयर्स को घरों में जाकर लूट करनी पड़ती है जहां पर बहुत सारी गन राइफल्स ग्रेनेड और बाकी चीजें मिलती है पहले भी हमने इस गेम के जैसे मूवी देखी है जिसका नाम है ह्गेंस और बैटल रॉयल और यह गेम भी उन्हीं मूवी से इंस्पायर्ड है.


PUBG - के बारे में हिंदी में जानकारी
Brendan Greene - Designer of PUBG Game


PUBG की शुरुआत कैसे हुई इसकी जानकारी 


ब्रेंडन ग्रीम जिन्हें ब्रैंडनप्लेयर अननोन ग्रीन भी कहते हैं इस गेम के डिजाइनर है पहले ब्रैंडन कोई गेम डिजाइनर नहीं थे बल्कि एक आयरिश फोटोग्राफर थे जिन्हें थोड़ा बहुत वेब डिजाइन और ग्राफिक डिजाइनर का काम आता था बाद में ब्रेंडन आईलैंड छोड़कर ब्रजील चले गए और वहां पर अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करी और कुछ सालों के लिए वहां पर ही बस गए 2 साल बाद उनका डाइवोर्स  हो गया और इस चीज से ब्रैंडन काफी डिप्रेस्ड हो गए डिप्रेशन की वजह से ब्रैंडन फिर से अपने घर।आईलैंड चले गए अपने पास टाइम में ब्रैंडन वीडियो गेम्स खेलने लगे जिसमें शामिल थे ट्रिपल टाइटल जैसे कि कॉल ऑफ ड्यूटी और असेषान क्रीड। आईलैंड में ब्रेंडन ने दो और गेमों की खोज की जिसके नाम थे अरमा और डीजल यह दोनों ही गेम ब्रेंडन को काफी पसंद आए अरमा एक मिलिटरी शूटिंग  गेम है और इसमें काफी मोड किए जा सकते हैं और दूसरी तरफ डीजल आर्म गेम का ही मॉड है जिसमें जोंबी से लड़ना पड़ता है फिर बाद में ब्रैंडन ने  डिजर्ट गेम का ही एक मोड बनाया जिसका नाम था डीजे बैटल रॉयल यह नया गेम काफी पॉपुलर हुआ और किसी को देखते हुए सोनी ऑनलाइन एंटरटेनमेंट जिसका नाम अब डेबरी कंपनी हो गया है उन्होंने ब्रैंडन को जॉब ऑफर दिया एक गेम बनाने  को जो कि एक सर्वाइवल गेम था और वह भी डीजल से ही इंस्पायर्ड था वह नया गेम जो ब्रैंडन नहीं सोनी कंपनी के साथ मिलकर बनाया था उसका नाम था एच् वन झेड वन  किंग ऑफ किंल फिर ब्रांडेड ने  डेबरी  नाम की कंपनी छोड़ दी और फेब्रुअरी 2016 में चले आए साउथ कोरिया वहां पर ब्रैंडन मिले एक कोरियन गेम डिजाइन चैन खान कीम से  जो ब्लू होल नाम की कंपनी में काम करते  थइ  और बैटल रॉयल गेम बनाना चाहते थे और वह भी डेजर्ट गेम से काफी इंप्रेस थे वो कोरियन गेम कंपनी एक ऐसी गेम बनाना चाहती थी जो किसी ने आज तक नहीं बनाया था उस कंपनी का आईडिया ब्रैंडन को अच्छा लगा और वह सभी लोग गेम बनाने में लग गए ब्रेंडन की टीम ने दिन-रात मेहनत करी और वह चाहते थे कि गेम 1 साल के अंदर ही बन जाए और साथ ही सस्ते में भी 2016 में गेम बनना शुरू हुआ और उनकी टीम की डेडलाइन सिर्फ 1 साल की थी पहले तो ब्रेंडन की टीम ने एक छोटा सा गेम बनाया जिसमें एक मैप  एक मोड़ और सिर्फ कुछ ही वेपन थे धीरे-धीरे गेम का डेवलपमेंट बढ़ता गया और फाइनली मार्च 2017 मे गेम बैटलग्राउंड्स को रिलीज किया.





PUBG - के बारे में हिंदी में जानकारी
PUBG Game


PUBG - के बारे में रिकार्ड्स की जानकारी  -

अर्ली  एक्सेस के रूप में स्टीम पर बैटलग्राउंड गेम गेमर्स को काफी पसंद आया क्योंकि ऐसा गेम गेमर्स ने  खेला ही नहीं था और यह एक पूरा नया कांसेप्ट था देखते ही देखते pubg की रैंकिंग बढ़ती रही और बहुत सारे गेम जुड़ते गए और ये  बेस्ट सेलर गेम बन गया जल्दी एक करोड राउंड खेले गये इस गेम के और सिर्फ 4 महीनों के अंदर 4500 करोड रुपए कमा लिए ब्लू होल काम की नहीं सिर्फ 11 दिनों के अंदर अप्रैल होते तक 10 लाख कॉपी बिक चुकी थी गेम की और अगले महीने 20 लाख कॉपी बिक गई और उसके अगले महीने 40 लाख कॉपी बिक चुकी थी पब जी ने बड़े-बड़े ऑनलाइन गेम जैसे  डॉटा 2, तू लीग ऑफ लेजेंड्स और काउंटर स्ट्राइक ग्लोबल ऑफेंसिव को भी हरा दिया और आज इस गेम की 90 लाख से ज्यादा एक्टिव यूजर है शुरू से ही इस गेम का मोटिव था सरवाइव करना और आज भी यह बदला नहीं है आने वाले वर्जंस मे  नए
 मैप ऐड  किए जाएंगे मगर ब्रैंडन के अनुसार यह ओरिजिनल मैप जिसने pubg की शुरुआत करी हमेशा ही आईकॉनिक रहेगा सितंबर 27 को pubg  कॉर्पोरेशन की शुरुआत हुई जो की ब्लू होल की 1 सब्सिडियरी कंपनी है और इसको ऑफिस अमेरिका में खोला गया आने वाले समय में यूरोप और जापान में भी ऑफिस खोले जाएंगे




PUBG - के बारे में हिंदी में जानकारी
PUBG Game

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi - Jankari Dunia

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते 

 Some Fact of Technology You Do not Know

Tech Fact - 1



Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
Tech Fact - 1

   नमस्कार दोस्तों आप देख रहे जानकारी दुनिया और टेक्नोलॉजी फैक्ट के नये एपिसोड में आपका स्वागत करते हैं जो आज से पहले आप नहीं जानते थे और इस को पढने के बाद आप जान जायेंगे कुछ मजेदार चीजे आपको जानने को मिलेगी चलिए शुरूवात करते हैं 

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
GPS



1 - आपको तो यही लगता होगा अगर आप अपने फ़ोन में GPS का इस्तेमाल करते हैं तो वह फ्री ऑफ कॉस्ट होता है उसके लिए आपको कोई भी पैसे नहीं देने पड़ते आप रास्ता ढूंढना चाहते हैं गली मोहल्ले, चौराहे में जाना चाहते हैं तो आप जब अपने गूगल मैप पर जाते हैं और लोकेशन चेक करते हैं इंटरनेट ऑन किया गाड़ी स्टार्ट की और निकल लिए कोइ पेसे नहीं देने पड़ते आपको लेकिन आपको बता दूं कि GPS पूरी तरह से फ्री नहीं है जैसा कि हम जानते हैं GPS टेक्नोलॉजी अमेरिका की है और इसके लिए पैसा अमेरिका वाले लोग देते हैं जितने भी लोग टैक्स भरते हैं उनके टैक्स की कमाई उनके पैसों की कमाई में से जो टैक्स जाता है वह GPS को फंडिंग करता है और इसका खर्चा 1 दिन का एक मिलियन डॉलर है जी हा वन मिलियन डॉलर 1 दिन का लगता है GPS को ऑपरेट करने चलाने में और यह सारे पैसे अमेरिकन टैक्स पयेर्स से आते हैं और हम तो फ्री में यूज कर रहे हैं ये एक फैक्ट है ज्यादातर लोग इसे नहीं जानते लेकिन अभी आप जान गए  





2 - 30 नवंबर को क्या आता है जी नहीं 30 नवंबर को मेरा हैप्पी बर्थडे नहीं है मेरा जन्मदिन नहीं है लेकिन 30 नवंबर को कंप्यूटर सिक्योरिटी डे होता है 30 नवंबर को कंप्यूटर सिक्योरिटी डे के तौर पर मनाया जाता है पूरे विश्व में जी हां तो उस दिन कम से कम अपने कंप्यूटर की सफाई कर लिया करो और यह देख लिया करो कि कोई वायरस तो नहीं है पूरे साल सही से रहे गा 


Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
iPhone 1



3 - क्या आपको पता है कि जब 2007 में स्टिव जॉब में iPhone प्रजेंट किया था लांच किया था उस की प्रेजेंटेशन की थी बहुत सारे लोगों के सामने दिखाया था कि हमने एक नया iPhone या पहला  iPhone लॉन्च किया है तो उस वक्त उस फोन में बग्स थे और वह पूरी तरीके से तैयार नहीं था यह इनसाइडर स्टोरी है ज्यादातर लोग नहीं जानते इंटरेस्टिंग चीज है जो वो फोन लांच हुआ था तो उन्हें एक बेंच डेस्क थी मतलब ऐसे कुछ अगर लकड़ी का था जहां पर वह स्पीच देने की जगह होती है वहां पर और तू वहां जो फोन था ठीक है रखा हुआ था तो वो बिच  बिच मे आके फोन को स्विच कर रहे थे क्योंकि वह फोन हैंग हो जाता था उसमे रैम ऑप्टिमाइजेशन ठीक नहीं थी वो लोगों को क्या बोलते कि मेरा iPhone पूरी तरीके से तैयार नहीं है डेट अनाउंस हो चुकी थी तो तीन,चार फोन रखे हुए थे के पीछे छुपा के जो अनाउंस टेबल थी वहां पर जो भी स्पीच देने की तो बीच-बीच में व हां से आते थे एक iPhone में कुछ करके दिखाया कॉल करके दिखाई उसको स्विच करके दूसरा वाला उठा लिया और फिर उसमें कुछ और करके दिखाया तो इस में बग्स थे Apple के एंप्लॉय और जितने भी सीनियर लोग थे बाद में यह बात उन्होंने  बताई कि ऐसी चीज भी हुई थी उसमें जो वीडियो क्लिप थी और जो ऑडियो क्लिप थी पहले iPhone में वो पूरी प्ले नहीं हो सकती थी सिर्फ कुछ हिस्सा  ही प्ले  हो सकता था अगर आप पूरी ऑडियो और वीडियो को प्ले करेंगे तो फोन क्रैश हो जाता जी हां यह बग था और यह स्टार्टिंग में किसी को भी नहीं बताया गया बाद में जब वह मार्केट में रिलीज हुआ फोन लांच हुआ तब इसको ठीक करके किया गया लॉन्च लेकिन जब उसकी प्रेजेंटेशन हुई थी तभी iPhone में ऐसा बग था एक और बग था की अगर आप ईमेल भेजते हैं उसके बाद इंटरनेट चलाते हैं तो वह सही से काम करता अगर आप ईमेल भेज रहे हो फिर इंटरनेट सब काम करेगा लेकिन अगर आप इंटरनेट सर्च करेंगे और उसके बाद ईमेल भेजेंगे तो वह नहीं जाएगा और फोन क्रैश  हो जाएगा यह बात मुझे नहीं लगता कोई जानता होगा पहले मैं भी नहीं जानता था लेकिन यह सच्चाई है अब आप जान गए 

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
Neil Armstrong (astronaut)



4 - अपोलो-11 मार्स मिशन के बारे में तो आप जानते ही होंगे जो लोग थे जो इंसान थे चांद पर उतर रहे थे नया दौर था कुछ नई चीज थी तो आपको पता है कि वह जो एस्ट्रोनॉट थे उनका लाइफ इंश्योरेंस उन्हें नहीं मिला था क्योंकि जो इंश्योरेंस कंपनी है उनको लग रहा था कि वह जिंदा लौटेंगे ही नहीं मर जाएंगे तो क्या किया गया था पता है उन्होंने अपने ऑटोग्राफ देकर अपनी फैमिली को दे दिए थे ताकि अगर वह उस मिशन से ना लौटे वह ऑटोग्राफ ऑक्शन में लगाकर उनकी जो फैमिली है वह पैसे कमा सके क्योंकि वह लोग हैं जो पहले गए थे जो जो चांद पर गए थे उन लोगों के ऑटोग्राफ है तो उनको बेचकर अपनी फैमिली के लिए पैसा इकट्ठा कर सके क्योंकि उनके फॅमिली मे कमाने वाले वही थे जो एस्ट्रोनॉट थे अगर वह ही नहीं बचेंगे तुम का खर्चा कैसे चलेगा उनके फॅमिली  कैसे चलेगी तो उन सारे एस्ट्रोनॉट ने  साइन करके अपने ऑटोग्राफ देकर अपनी फैमिली को दे दिए थे इन केस वो जिन्दा ना लौट आए तो उसे ऑटोग्राफ को बेच कर पैसे ले ले तो ऐसा हुआ था और यह कोई नहीं जानता था  

Technology के कुछ ऐसे Fact जो आप नहीं जानते Hindi
Drone

शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi - Jankari Dunia

शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi - Jankari Dunia

From the beginning to the end, Sachin Tendulkar's biography Hindi

     
शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi
Sachin Ramesh Tendulkar

      दोस्तों भारत में क्रिकेट को एक खेल ही नहीं बल्कि एक धर्म का दर्जा दिया गया है और उस धर्म में सचिन भगवान की तरह पूजे जाते हैं दोस्तों सचिन युवा क्रिकेटर है जिसने भारतीय क्रिकेट को एक नई ऊंचाई दी और क्रिकेट के खेल को घर घर तक पहुंचा दिया एक समय तो ऐसा था कि सचिन के आउट होते ही आधा भारत टीवी बंद कर देता था और क्रिकेट में सचिन को भगवान का दर्जा देना शायद इसलिए भी सही है क्योंकि अगर रिकॉर्ड की बात करें तो सचिन के आस-पास भी कोई नहीं भटकता सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड हो या शतक मारने का या फिर चौका लगाने का ही क्यों ना हो सचिन हर रिकॉर्ड में सबसे आगे हैं एक बार तो सचिन तेंदुलकर की तारीफ में एक ऑस्ट्रेलियन प्रशंसक ने कहा कि अपराध तब करो जब सचिन बैटिंग कर रहा हो क्योंकि भगवान भी उस समय उनकी बैटिंग देखने में व्यस्त होते हैं सचिन भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी हैं इसके अलावा उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है सचिन एक अच्छे खिलाडी होने के साथ ही साथ एक अच्छे इंसान भी हैं और हर साल 200 बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी के लिए अपनालय नाम की एक गैर सरकारी संगठन भी चलाते हैं दोस्तों आइए बिना आपका समय खराब किए हम सचिन तेंदुलकर की बचपन से लेकर क्रिकेट में उनकी अद्भुत सफलता तक के सफर को शुरू से जानते हैं|

शुरू से लेके अंत तक सचिन तेंदुलकर की Biography Hindi
Sachin Ramesh Tendulkar


February मैं सिर्फ 28 Days ही क्यों होते है? - Jankari Dunia

February मैं सिर्फ 28 Days ही क्यों होते है?

Why is February only 28 days?



आज मैं आपको बताऊंगा कि फेब्रुअरी में 28 डेज क्यों होते हैं अगर ब्लॉग अच्छा लगे तो ब्लॉग सब्सक्राइब करेगा उसके साथ ब्लॉग को इतना शेयर करेगा आपके सारे फ्रेंड के साथ ताकि उनको भैया पता चले कि फेब्रुअरी में 28 डेज क्यों होते हैं ना इसमें आपको बताऊंगा फेब्रुअरी में 28 डेज क्यों होते उसके बारे में समझते 29 कहां से आता है तो होता क्या है कि जो हमारा अर्थ है वह सन के आसपास घूम रहा है घूम रहा है घूम रहा है इसको पूरा ऑर्बिट इसका कंप्लीट करने में लग जाता है 360 5.24 डेस यानी अगर मिस कर रहा हूं प्लीज अर्जेंट होता है 365 पॉइंट 25 डेट मतलब 0.25 206 घंटे साल में 6 घंटे पीछे हो जाते अगर हम फरवरी में जो है अगर 28 डेस के सबसे चले तो ऐसे ही करते करते 4 साल में हम एक दिन बना लेते वह एक दिन हम पूरी के 29 डे में ऐड कर देते ताकि हम सिनकोनाज मुझे चारों तरफ से और हमारी लाइफ से जो 4 सालों में हमने एक दिन गवा दिया वह हमारी लाइफ में वापस आ जाए यह सिंक्रोनाइजेशन के लिए 29 जो है वह लीप ईयर कहा जाता है जो कि 4 साल में एक बार आता है यह तो बात हो गई 29 की लेकिन अब जो असली क्वेश्चन है वह फरवरी में ही क्यों मार्च में क्यों नहीं अप्रैल में क्यों नहीं पाया इसके लिए चलना पड़ेगा बहुत पीछे जब भी कैलेंडर बना था तुझे बना था रोमन के द्वारा रोमन की जो पहले क्यों थे उनके सामने चुनौती है की बहुत बार बार फेस्टिवल आ रहे हैं बार-बार सीजन चेंज हो रहा है तो इन लोगों को जोड़ें वह मैपिंग करना था कि कौन से मंथ में कौनसा सीजन अरे कौन सा फेस्टिवल आ रहा है तीन लोगों ने बैठक 1 मार्च से लेकर दिसंबर तक 10 मंथ का पहला कैलेंडर बनाया और इनका जो कैलेंडर है वह मार्च से स्टार्ट होता था दिसंबर तक खत्म होता था मतलब जनवरी और फरवरी तो था ही नहीं तो इन लोगों ने दिमाग लगाकर कुछ महीनों में 30 डेज दीजिए कुछ महीनों में 31 डेज दे दी के बाद चुनौती है आज आई क्यों नहीं 2 महीने छोड़े इसलिए छोड़ दिया कि वह 2 महीने में लोग काम नहीं करते थे कुछ काम ही नहीं करते तो उसको केलकुलेट क्यों करना तुम उनको बाद में पता चला कि जब मैं गर्मी आ रही थी दो-तीन साल बाद उस मार्च में तो भैया ठंडी आने लगी तुमको समझ आएगी जो 2 महीने में छोड़ रहे हैं वह गलत छोड़ रहे हैं घुमा फिरा के पूरे साल में यह 61.25 भेजो है वह भूल जाते देखा जाता उसके बाद एक नया राजा आया रूस का उसने क्या किया उसने बोला कि भैया नंबर है वह बैड लक होता है जहां जहां अपने 3030 दिन दिया जिसमें सब में से एक-एक दिन हटा दो ऐसे करते-करते ने मार्च से दिसंबर तक जो कैलेंडर बनाया उसमें दिन और कम कर दिया को टोटल हो गए 298 अब हुआ क्या किसने बोला कि भैया जो मुंह है हमारा मून जो है वह अलग अलग तरीके से हम को दिखता है 29.58 लगते थे

एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में - Jankari Dunia

एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में | Elon Musk Success Story In Hindi

एलोन मस्क सफलता की कहानी हिंदी में | Elon Musk Success Story In Hindi
Elon Musk


   खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं यह वाक्य आज से सालों पहले महात्मा गांधी ने कहे थे और इन वाक्य  को अगर किसी व्यक्ति ने हकीकत में बदला है तो वह है एलोन मस्क,एलोन मस्क अफ़्रीकी मुल्क के इनवेस्टर, इंजीनियर और बिजनेसमैन है और आज के समय में भी पूरी दुनिया में अपनी दूरगामी सोच की वजह से काफी प्रसिद्धि पा चुके हैं उनकी सोच हमेशा से ही इंसानों की परेशानियों को दूर करने पर केंद्रित रही है और इसी सोच की वजह से मैं पूरी दुनिया भर में जीनियस एंटरप्रिनिअर के नाम से भी जाने जाते एलोन आज के समय में फ़ोर्ब्स के अनुसार दुनिया के इकिस्वे सबसे धनी व्यक्ति है लेकिन दोस्तो  कोई भी व्यक्ति जन्म से अमीर नहीं होता इस पायदान पर पहुंचने के लिए उसे ना जाने कितनी मेहनत करनी पड़ती है ठीक उसी तरह ही एलोन मस्क ने भी बचपन से ही काफी मेहनत की और बहोत सारे संघर्षों के बाद आज लाखों युवाओं के लिए इंस्पिरेशन बन चुके हैं तो चलिए दोस्तों एलोन मस्क  के मोटिवेशनल लाइफ जर्नी को हम शुरू से जानते हैं |

    तो दोस्तों कहानी की शुरुआत होती है आज से करीब 46 साल पहले से जब साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया शहर में 28 जून 1971 को एलोन मस्क का जन्म हुआ उनके पिता का नाम एरोल मस्क था और वे  एक इंजीनियर होने के साथ-साथ एक पायलट भी थे और उनकी मां का नाम मेंही मस्क था  जो कि एक मॉडल और डाइटिशियन थी एलोन मस्क बचपन से ही पढ़ने में काफी दिलचस्पी रखते थे और हमेशा ही किताबों के आसपास देखे जाते थे और सिर्फ 10 साल की उम्र में उनको कंप्यूटर से काफी इंट्रेस्ट हो गया था और सिर्फ 12 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीकर एक ब्लास्टर नाम का गेम बना डाला जिसे कि उन्होंने $500 की कीमत पर PC एंड ऑफिस टेक्नोलॉजी नाम की एक कंपनी को बेच  दिया और यहीं से एलोन मस्क की  प्रतिभा साफ साफ झलकती लगी थी वह बचपन में आयजक,असीमो की किताबें पढ़ा करते थे और शायद यही से उनको टेक्नोलॉजी के प्रति इतना लगाव हो गया बचपन में एलोन मस्क को स्कूल के दिनों में बहुत परेशान किया जाता था एक बार तो कुछ लड़कों के ग्रुप में उनको सीढ़ियों से धक्का दे दिया और उनको तब तक मारा जब तक की वह बेहोश नहीं होगये  इसके लिए उन्हें कई दिनों तक हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा था लेकिन दोस्तों एलोन मस्क को भले ही बचपन में इतनी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा पर आगे चलकर उन्होंने मानवता के हित में काफी सराहनीय काम किया 17 साल की उम्र में एलोन मस्क ने क्वीन यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की और वहां पर 2 साल पढ़ने के बाद मैं यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया ट्रांसफर हो गए जहां उन्होंने 1992 में फिजिक्स में बैचलर ऑफ साइंस डिग्री ली 1995 में एलोन मस्क PhD करने के लिए कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गए लेकिन वहां पर रिसर्च शुरू करने की मात्र 2 दिन के अंदर ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और एक सफल व्यवसाई बनने के लिए अपने कदम बड़ा लिए 1995 में अपने भाई के साथ एलोन मस्क ने  जीप टू नाम की एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की जिसे कि आगे चलकर कॉन्पैक्ट ने 307 मिलियन डॉलर जैसी बड़ी रकम देकर खरीद ली और इसके बिकने के बाद जिप टू में अपने साथ परसेंट के शेयर से एलोन मस्क को कुल

संजय दत्त का जीवन परिचय - नायक से खलनायक तक का सफर - Jankari Dunia

संजय दत्त का जीवन परिचय - नायक से खलनायक तक का सफर | Introduction of Sanjay Dutt - Journey from Hero to Villain

Sanjay Dutt Jankari Dunia
Sanjay Dutt Image by gettyimages



          दोस्तों वक्त और हालात एक ऐसी चीज है जो कभी भी किसी को नायक और किसी को खलनायक बना सकती है, और दोस्तों आज की हमारी कहानी भी एक ऐसे ही एक्टर की है जिसके बुरे वक़्त और हालातों ने उसे रियल लाइफ का विलेन बना दिया हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर संजय दत्त की जो कि अब तक लगभग 190 फिल्मों में पुलिस गैंगस्टर और हीरो की तरह ही कई सारे अलग-अलग किरदार निभा चुके हैं और इन रोल्स ने उन्हे लोगों के बीच काफी फेमस भी किया है हालांकि दो तो संजय दत्त बॉलीवुड में जितनी अच्छी और सफल एक्टर माने जाते हैं उतने ही विवादों में उनका जीवन भी रहा है और संजय दत्त की कहानी के ऊपर ही 29 जून 2018 को उन की बायोपिक संजू भी आ रही है और इस बायोपिक की शूटिंग शुरू होने के बाद से ही यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है साथ ही उनका रियल लाइफ किरदार निभा रहे हैं रणबीर कपूर ने इस बायोपिक में अपनी शानदार एक्टिंग से लोगों का मन मोह लिया है तो चलिए दोस्तों अपनी लाइफ में काफी उतार-चढ़ाव देख चुके संजय दत्त की पूरी लाइफ जर्नी को हम शुरू से जानते हैं तो दोस्तों इस कहानी की शुरुआत होती है 29 जुलाई 1959 से जब मुंबई स्टेट में संजय दत्त का जन्म हुआ उनके पिता का नाम सुनील दत्त था जोकि बॉलीवुड के ही एक जाने-माने ऐक्टर थी साथ ही उनकी मां का नाम नरगिस और वह भी भारतीय सिनेमा जगत में किसी पहचान की मोहताज नहीं  संजय दत्त ने अपने शुरुआती पढ़ाई द लॉरेंस स्कूल से की और फिर कॉलेज की पढ़ाई के लिए वह एलफिंस्टन कॉलेज गए  वैसे तो संजय दत्त ने 1972 में ही अपना फिल्मी करियर रेशमा और शेरा नाम की मूवी में एक छोटा सा रोल अदा करके शुरू कर दिया था लेकिन अपना खुद का नाम बनाने में और बतौर लिड  एक्टर  उनकी फिल्म आने में कई साल लग गए दोस्तों  संजय दत्त भले ही सुनील दत्त और नरगिस के बेटे थे लेकिन एक्टिंग में अगर उन्हें लंबे समय तक अपना नाम बनाना था तो स्क्रीन पर अच्छी परफॉर्मेंस तो दे नहीं थी और फिर 1972 में एक छोटे से रोल के  बात से उन्होंने अपनी एक्टिंग के  स्किल्स को  और भी बेहतर किया परंतु यहां मेहनत दिखाई दी 1981 की फिल्म रॉकी से जोकि बॉक्स ऑफिस पर बहुत ही बड़ी हिट साबित हुई और अपनी पहली मूवी सही संजय दत्त ने बता दिया था कि मैं लंबी रेस के घोड़े

दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी - Jankari Dunia


दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी |

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दूसरे महायुद्ध की सम्पूर्ण जानकारी




        नमस्कार दोस्तों जानकारी दुनिया में आपका स्वागत है आज हम बात करेंगे उस महायुद्ध की जिस की घटनाओं ने दुनिया के हर पहलू को बदल कर रख दिया जो इतिहास का एक कलंक है और खुद अपने आप में एक इतिहास है जिसके बारे में जानने के लिए दुनिया का हर इंसान उत्सुक रहता है जी हां आज हम बात करेंगे दूसरे विश्वयुद्ध की दूसरे विश्वयुद्ध को ग्लोबल वॉर या टोटल वॉर कहा जाता है ग्लोबल या टोटल वह इसलिए क्योंकि इस विश्व युद्ध में सिर्फ सैनिक ही नहीं बल्कि देश के आम आदमी भी शामिल थे जब पहले वॉर होती थी तो सेना ही आपस में लड़ते थे लेकिन इस विश्वयुद्ध में सामान्य जनता को भी टारगेट किया गया था किसी भी देश में अपने दुश्मन देशों में घुसकर आम जनता पर गोले बरसाए थे उन पर बम फेंके थे और उन पर मिसाइलें दागी थी इसलिए इस विश्व युद्ध में कोई भी इंसान ऐसा नहीं था जिस पर जान का खतरा ना हो इसी कारण इसे टोटल वार या ग्लोबल वॉर भी कहा जाता है यह युद्ध 1939 से लेकर 1945 तक चला था और इस युद्ध में दो मेन पावर थे एक था एग्जिट पावर जिसमें जर्मनी इटली जापान हंगेरी रोमानिया और बुल्गारिया जैसे देश शामिल थे जबकि दूसरी तरफ एलियन पावर के निशान थे जिसमें यूएस ब्रिटेन फ्रांस यूएसएसआर ऑस्ट्रेलिया ब्राजील कैनेडा