मंगल ग्रह से जुडी 10 अनोखी जानकारी - Jankari Dunia



 मंगल ग्रह से जुडी 10 अनोखी जानकारी

10 Unique Information Related to Mars


10 Unique Information Related to Mars
मंगल ग्रह से जुडी 10 अनोखी जानकारी



        दोस्तों पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जिस पर सभी तरह का जनजीवन आसानी से फल-फूल सकता है अगर विज्ञान की माने तो उनके अनुसार हमारे पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कई ग्रह ऐसे हैं जहां पर जीवन की उत्पत्ति हो सकती है या वहां पर जीवन पहले से मौजूद हो सकता है और क्या पता वहां पर जो जीवन है वह हमसे भी ज्यादा उन्नत हो और अब तक जिस ग्रह के बारे में विज्ञानिक सबसे ज्यादा पता लगा पाए हैं वह मंगल ग्रह मंगल ग्रह एक ऐसा ग्रह है जो हमारे सौरमंडल में पृथ्वी से सबसे ज्यादा मिलता जुलता है लेकिन जैसे-जैसे मनुष्य मंगल के और ज्यादा करीब पहुंच रहा है वैसे-वैसे मंगल पर पर्दा उठने की वजाय वहां के रहस्य और भी ज्यादा गहरा थे जा रहे हैं इससे बहुत ज्यादा मिलने जुलने के कारण यह धरती वासियों के लिए एक रोचक ग्रह बन चुका है तो चलिए आज के ब्लॉग में देखते हैं मंगल ग्रह पर कुछ रहस्यमई तथ्य जो वहां पर विज्ञानिकों ने ढूंढ निकाले हैं तो 


1 मंगल ग्रह पर मीथेन गैस का होना साल 2003 में यूरोपियन स्पेस एजेंसी के यान  मार्स एक्सप्रेस ने सबसे पहले मंगल ग्रह के वातावरण पर मीथेन गैस का पता लगाया था मीथेन गैस रंगहीन गंधहीन और ज्वलनशील गैस होती है और साथ ही सर्वोत्तम जैविक अणु भी है पृथ्वी के वातावरण में मिलने वाली मीथेन गैस सबसे ज्यादा पशुओं के खाने और पचाने के वजह से पैदा होती है लेकिन मंगल पर अभी तक जीवन के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं इसलिए यैह एक मिस्ट्री ही है कि वह मिथेन गैस कैसी आई है एक अनुमान के अनुसार मंगल ग्रह पर मिलने वाली मिथेन गैस इस  ग्रह पर होने वाली आंतरिक प्रक्रियाओं की वजह से पैदा होती है लेकिन इन प्रक्रिया के बारे में अभी तक पता नहीं चल सका है कुछ विज्ञानिकों के अनुसार यह गैस मंगल ग्रह की सतह के नीचे मिलने वाले पानी और वहां की सूक्ष्म जीवों के बीच कितनी हुई प्रतिक्रिया से पैदा होती है मिथेन गैस पैदा होने की दूसरी प्रक्रिया के बारे में विज्ञानिक कहते हैं जैसे मंगल ग्रह पर गिरने वाली ब्रह्मांडीय धूल और उससे पढ़ने वाली अल्ट्रावायलेट रेस है भी है पैदा हो सकती है लेकिन सिर्फ अनुमान ही है और प्रामाणिक तौर के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता 2011 में नासा द्वारा भेजे गए अंतरिक्ष यान यूनिवर्सिटी  में पता लगाया कि मंगल ग्रह पर मिथेन की मात्रा अचानक से 7 गुना ज्यादा बढ़ गई है ऐसा क्यों हुआ यह एक रहस्य बना हुआ है 


2 सोने की दीवारें पृथ्वी की तरह मंगल पर भी उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ जमी हुई है लेकिन यह बर्फ पानी से नहीं बल्कि जमी हुई कार्बन डाइऑक्साइड गैस से बनी हुई है अगर आपको आम सी भाषा में बताए तो हम इसे ड्राई आइस भी केह  सकते हैं इस की खास  बात किए हैं यह तापमान बढ़ने पर भी नहीं दी गई थी बल्कि गैस में परिवर्तित हो जाती है उत्तरी ध्रुव पर मिलने वाली परत बहुत पतली है जबकि दक्षिणी ध्रुव पर ड्राई आइस की मोटी चादर ढकी हुई है जहां मिली कुछ असाधारण आकृतियों ने वैज्ञानिक को भी हैरानी में डाल रखा है जिनमें से एक है यहां मिलने वाली ड्राई आइस की विशाल खाई है जिनकी स्पष्ट तस्वीरें नासा द्वारा भेजे गए एक विमान में खींची  है हिना को देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे इन खायी  को एक सोने की बनी दीवार निर्माण श्रमिक घेर रखा हूं यह भी एक रहस्य  ही है इन बर्फ की विशाल खायो का निर्माण कैसे हुआ और यह सोने जैसी दिखने वाली दीवार में मस्त रचनाएं वास्तव में सोना ही है क्या


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3 मंगल ग्रह पर मिला समंदर मंगल ग्रह पर मिलने वाला अधिकांश पानी सिर्फ बर्फ के रूप में मौजूद हैं हालांकि कुछ मात्रा में यह पानी एनवायरनमेंट में भाप  के रूप में मौजूद है मंगल ग्रह पर यह पानी बर्फ के रूप में जिस स्थान पर पाया जाता है वह है दक्षिणी ध्रुव और उत्तरी ध्रुव यहां पर मौजूद ड्राई आइस इतनी विशाल मात्रा में मौजूद है अगर यह ड्राई आइस पिघलकर पानी बन जाए तो पूरा मंगल ग्रह 35 फीट पानी में डूब सकता है पर अभी पानी द्रव रूप में मिलने के चांस बहुत कम है क्योंकि वायुमंडलीय दबाव कम होने के कारण यह पानी स्तर पर रहेगा ही नहीं वह उड़कर अंतरिक्ष में चला जाएगा लेकिन कई दशकों से यह माना जा रहा है कि प्राचीन समय में मंगल ग्रह है आज के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्म और नवम स्थान था और वायुमंडलीय दबाव भी आज की अपेक्षा बहुत ज्यादा रहा होगा विशेष बात की संभावना बढ़ जाती है मार्स  ग्रह कि स्तर पर कभी बहुत विशाल मात्रा में पानी बहता रहा होगा जिसकी मात्रा लगभग दो करोड़ क्यूब किलोमीटर रही होगी जो कि धरती के अंटआर्टिक महासागर से भी ज्यादा है 


4 मंगल ग्रह के दो पक्ष मंगल ग्रह के दो पक्ष सदियों से खगोल शास्त्रियों के लिए एक अनसुलझी पहेली बने हुए हैं जहां मंगल ग्रह की उत्तरी गोलार्ध दिशाएं चिकनी है और दक्षिणी गोलार्ध के मुकाबले नीची है वही इसका दक्षिणी गोलाकार समतल है और वह उतरी गोलाकार  के मुकाबले 4 से 8 किलो मीटर ऊंची ज्वालामुखी जैसी श्रंखलाओं से भरा हुआ है कई लोगों का यह मानना है कि उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के बीच यह विषमता उस पानी की वजह से है जो कभी मंगल ग्रह पर बेहता रहा होगा जबकि मंगल ग्रह पर मिली कुछ नई जानकारियों से ऐसा लगता है कि लाखों साल पहले प्लूटो के आकार का कोई ग्रह मार्स  के उत्तरी गुलाब से टकरा गया होगा जिसने इस की फतेह को समतल कर दिया होगा मगर इसके बारे में प्रमाणित तौर पर कुछ कहना मुश्किल है 


पृथ्वी से मंगल ग्रह की समानता हालांकि आज मंगल ग्रह एक ठंडी और यहां का वातावरण एक वीरान जगह है लेकिन कभी यह पृथ्वी जैसा ग्रह रहा होगा एक अध्ययन के अनुसार मंगल ग्रह पर भी पानी था और यहां का इन्वायरमेंट आज के मुकाबले पृथ्वी के जैसा ही रहा होगा वह जीवन को संभव बनाने के लिए अनुकूल रहा होगा हालांकि अब तक की गई खोजों में मंगल ग्रह पर जीवन की प्रमाण नहीं मिला है लेकिन लाखों साल पहले यह हरा भरा रहा होगा क्योंकि तब इस ग्रह पर पर्याप्त मात्रा में नमी होगी और जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी पानी ही रहा होगा  


6 मंगल ग्रह पर जीवन कई सदियों से मनुष्य इस बात की अटकलें लगाता रहा है की मंगल ग्रह पर जीवन है कि नहीं उदाहरण के तौर पर 19वीं शताब्दी के अंत में अमरीकी खगोलशास्त्री ने दावा किया था कि उन्होंने मंगल ग्रह की सतह पर लहरें जैसे सरचनाये देखी है लेकिन आधुनिक शोध से मंगल ग्रह पर किसी विकसित सभ्यता के होने के प्रमाण नहीं मिले हैं लेकिन यह ग्रह काफी लंबे समय से नम रहा था इसलिए यहां जीवन के पनपने की आदर्श टीचर मोजूद रही होंगी अमेरिकी यान के द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यह ग्रह करीब करीब डेढ़ करोड़ साल तक नम रहा है जो कि धरती पर जीवन के पनपने के लिए दिए गए समय से कहीं अधिक है धरती पर जहां कहीं भी पानी है वहां जीवन है क्या मंगल ग्रह के लिए भी यह बात सच रही होगी विज्ञानिकों के अनुसार हमारे सौरमंडल पर कभी जीवन के होने की संभावना सबसे अधिक है और हो सकता है कि आप भी वहां पर जीवन हो 1975 में नासा द्वारा भेजे गए यान अब तक का अकेला ऐसा यान  है जिस में मंगल ग्रह पर जीवन होने की खोज की थी लेकिन इस से मिली जानकारी आज भी बहस का विषय बनी हुई है


7 मंगल ग्रह पर घाटी मंगल ग्रह पर लगभग 4000 लंबी 2000 किलो मीटर चौड़ा और 7 किलो मीटर गहरी घाटी है यह सौरमंडल की सबसे बड़ी घाटी और उसने मंगल ग्रह को दो हिस्सों में बांट रखा है लेकिन यहां घाटी कैसे बनी यह एक रहस्य  से बनी हुई है मंगल की परिधि के लगभग 20% के बराबर की है घाटी कैसे बने इसके बारे में कोई मान्यता है जहां कुछ लोग यह मानते हैं कि करोड़ों साल पहले जब यह ग्रह ठंडा हो रहा था तब कुछ  भू गर्भिय से बाहर निकली होगी जिसे घाटी बनी होगी कुछ लोग मानते हैं यह घाटी छोटे ग्रह के टकराने से बनी होगी सौरमंडल में सबसे बड़ा ज्वालामुखी पहाड़ भी यहीं पर है जिसको ओल्य्म्पियस मून भी कहां जाता है इसकी ऊंचाई 27 किलोमीटर है जो माउंट एवरेस्ट से 3 गुना ज्यादा है ऐसा भी कहा जाता है यह घाटी एक ज्वालामुखी से भारी मात्रा में निकले हुए मैग्मा से बनी है

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मंगल ग्रह से जुडी 10 अनोखी जानकारी



8 मंगल का पानी क्योंकि हम जानते हैं कि करोड़ों साल पहले मंगल पर बहुत पानी था तो सवाल यह है कि मंगल पर ऐसा क्या हुआ कि सारा पानी गायब हो गया इस बारे में कई सारी मान्यताएं हैं कुछ लोग दावा करते हैं कि ऐसा मंगल के झुमके क्षेत्र के गायब होने के कारण हुआ होगा जिससे सूर्य का रेडिशन मंगल ग्रह पर सीधा पड़ा और इसका वायुमंडल और समुद्र का पानी भाप बनकर उड़ गया ऐसा माना जाता है कि पानी बनाने वाले हाइड्रोजन के परमाणु अंतरिक्ष में उड़ गए होंगे और इसका वायुमंडल खाली हो गया होगा और इस तरह धीरे-धीरे इस ग्रह का सारा पानी और इको सिस्टम अंतरिक्ष में भाप बनकर उड़ गया होगा लेकिन इसका उनके चित्र क्यों गायब हो गया यह भी आज तक एक पहेली भी नहीं हुई है 


9 मंगल के चांद मंगल पर दो छोटे चांद है होबोस और डिमोस, होमोस का व्यास लगभग 14 मील है जबकि डीमोस  व्यास लगभग 8 मिल है देखने में दोनों आलू के आकार के लगते हैं लेकिन मैं बहुत सारे रहस्य से पहले तू यह दोनों कैसे बने यही सोचने का विषय है कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह दोनों मार्स से ही टूट कर बने हुए हैं लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का मानना है यह छोटा ग्रह जब मार्स  के पास से गुजरे तो मार्स  की ग्रेविटी के कारन यह दोनों मार्स  की परिक्रमा करने लगे मंगल के पहले चांद होमोस  के  साथ एक विषमती जुड़ी हुई है जो है उसकी सतेह  पर 85 मीटर ऊंची चट्टानें जिसे होबोस मनोलीत के नाम से जाना जाता है यह एक साधारण सरचना है और रहस्येमय भी सन 1988 में होबोस की जानकारी के लिए दो मानवरहित उपग्रह होबोस 1 और होबोस 2 लॉन्च किए गए थे लेकिन यह दोनों रहस्यमई तरीकों से गायब हो गए


10 क्या हम सब मंगल ग्रह से आए हैं हम सब के लिए एक सवाल है क्या हम सब मंगल ग्रह से आए हैं हालांकि करोड़ों साल पहले मंगल ग्रह पर परिस्थितियां जीवन के अनुकूल थी लेकिन इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि क्या धरती पर जो जीवन है वह मंगल ग्रह से आया होगा हम यह तो नहीं जानते कि मंगल ग्रह पर कितने समय तक जीवन के अनुकूल बना रहा होगा लेकिन यह समय धरती पर जीवन के पनपने के समय से मेल खाता है जहां जीवन लगभग 8 करोड़  साल पहले शुरु हुआ था अगर यह परिकल्पना सच है कि कभी मंगल ग्रह पर कोई बहुत बड़ी टक्कर हुई होगी तो यह माना जा सकता है की मंगल ग्रह का कोई टुकड़ा जीवाणु के साथ धरती पर आकर गिर गया होगा जिससे धरती पर जीवन का आरंभ हुआ हम यह जानते हैं कि धरती पर पैदा हुए इससे पहले जिव से पहले धरती पर कुछ भी नहीं था इसलिए धरती पर जीवन मंगल ग्रह से आया है यह सिद्धांत काफी हद तक सही लगता है 


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